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Ram Nath Kovind Farewell Speech: निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद छोड़ने की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को किया संबोधित

 Written By: Pankaj Yadav
 Published : Jul 24, 2022 08:04 pm IST,  Updated : Jul 25, 2022 06:39 am IST

Ram Nath Kovind Farewell Speech: भारत के निवर्तमान राष्ट्रपति ने पद छोड़ने से पहले आज देश को शाम 7 बजे संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मैं देश की जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को सलाम करता हूं। मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने भारत के राष्ट्रपति के पद पर 5 सालों तक काम किया।

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Highlights

  • राम नाथ कोविंद ने पद छोड़ने की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को किया संबोधित
  • देश के 14वें राष्ट्रपति रहे राम नाथ कोविंद, आज उन्होंने पद छोड़ दिया
  • 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए चुनी गईं द्रौपदी मुर्मू कल लेंगी शपथ

Ram Nath Kovind Farewell Speech: भारत के निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को पद छोड़ने से पहले शाम 7 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं देश की जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को सलाम करता हूं। मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने भारत के राष्ट्रपति के पद पर 5 सालों तक काम किया। 5 साल पहले मैं आपके चुने हुए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से राष्ट्रपति चुना गया था। राष्ट्रपति के रूप में मेरा कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। मैं आप सभी और आपके जन प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं। 

कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति थे। उनका कार्यकाल 2017 से लेकर 2022 तक था। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा कि मैं सभी देशवासियों को आभआर व्यक्त करता हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान मुझे हर वर्ग से पूरा सहयोग मिला। आज देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। 

हमें अपने राष्ट्र-निर्माताओं के पदचिह्नों पर चलना है

मेरा हमेशा से दृढ़ विश्वास रहा है कि बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में कुछ दशकों की अवधि के भीतर इस देश ने ऐसे कई नेता दिए जो व्यक्तित्व के धनी थे। हमारे पूर्वजों और हमारे आधुनिक राष्ट्र-निर्माताओं ने अपने कठिन परिश्रम और सेवा भावना के द्वारा न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों को चरितार्थ किया था। हमें केवल उनके पदचिह्नों पर चलना है और आगे बढ़ते रहना है। 

शिक्षकों से जुड़े रहने की परंपरा को आज के युवा भी जारी रखें

रामनाथ कोविंद ने संबोधन के दौरान कहा कि मुझे याद है जब मैं राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अपने पैतृक गांव गया था और अपने स्कूल के बुजुर्ग शिक्षकों से मिला था। आशिर्वाद लेने के लिए उनका पैर छूना मेरे जिंदगी के सबसे यादगार लम्हों में से एक था। भारतीय संस्कृति हमें अपने जड़ों से जुड़े रहना सिखाती है। मैं युवा पिढ़ी से अनुरोध करूंगा कि वह अपने गांव, कस्बे, स्कूल और शिक्षकों से जुड़े रहने की इस परंपरा को जारी रखें।

सीमा पर डटे जवान प्रेरणा की मिशाल

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं विशेष रूप से उन अवसरों को याद करूंगा जब मुझे सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों और पुलिस के हमारे बहादुर जवानों से मिलने का अवसर मिला। उनका देशभक्ति का उत्साह जितना अद्भुत है, उतना ही प्रेरणादायक भी है। 

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