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RSS Chief Mohan Bhagwat : 'जनसंख्या पर सबके लिए समान नीति बने', विजयादशमी पर संघ प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

RSS Chief Mohan Bhagwat : उन्होंने कहा कि एक भूभाग में जनसंख्या में संतुलन बिगड़ने का परिणाम है कि इंडोनेशिया से ईस्ट तिमोर, सुडान से दक्षिण सुडान व सर्बिया से कोसोवा नाम से नये देश बन गये।

Written By: Niraj Kumar
Published : Oct 05, 2022 10:32 am IST, Updated : Oct 05, 2022 03:51 pm IST
RSS Chief Mohan Bhagwat- India TV Hindi
Image Source : ANI RSS Chief Mohan Bhagwat

Highlights

  • जनसंख्या पर ऐसी ऐसी नीति बननी चाहिए जो सभी पर समान रूप से लागू हो-संघ प्रमुख
  • जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ पंथ के आधार पर जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय-संघ प्रमुख

RSS Chief Mohan Bhagwat : नागपुर में आयोजित विजयादशमी समारोह में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya swayam sewak sangh) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने जनसंख्या नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनसंख्या को लेकर एक ऐसी नीति बननी चाहिए जो सभी पर समान रूप से लागू हो तभी जनसंख्या नियंत्रण के नियम परिणाम ला सकेंगे। उन्होंने कहा कि एक भूभाग में जनसंख्या में संतुलन बिगड़ने का परिणाम है कि इंडोनेशिया से ईस्ट तिमोर, सुडान से दक्षिण सुडान व सर्बिया से कोसोवा नाम से नये देश बन गये। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ पंथ के आधार पर जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा- 'जनसंख्या नीति सारी बातों का समग्र व एकात्म विचार करके बने, सभी पर समान रूप से लागू हो, लोकप्रबोधन द्वारा इसके पूर्ण पालन की मानसिकता बनानी होगी। तभी जनसंख्या नियंत्रण के नियम परिणाम ला सकेंगे।जब-जब किसी देश में जनसांख्यिकी असंतुलन होता है तब-तब उस देश की भौगोलिक सीमाओं में भी परिवर्तन आता है। जन्मदर में असमानता के साथ-साथ लोभ, लालच, जबरदस्ती से चलने वाला मतांतरण व देश में हुई घुसपैठ भी बड़े कारण है।'

रोजगार

उन्होंने अपने संबोधन में रोजगार का भी उल्लेख किया। मोहन भागवत ने कहा- रोज़गार मतलब नौकरी और नौकरी के पीछे ही भागेंगे और वह भी सरकारी। अगर ऐसे सब लोग दौड़ेंगे तो नौकरी कितनी दे सकते हैं? किसी भी समाज में सराकरी और प्राइवेट मिलाकर ज़्यादा से ज़्यादा 10, 20, 30 प्रतिशत नौकरी होती है। बाकी सब को अपना काम करना पड़ता है। इसलिए उद्यमिता की प्रवृति बढ़नी चाहिए।

सामाजिक समता

उन्होंने कहा-'संविधान के कारण राजनीतिक तथा आर्थिक समता का पथ प्रशस्त हो गया, परन्तु सामाजिक समता को लाये बिना वास्तविक व टिकाऊ परिवर्तन नहीं आयेगा ऐसी चेतावनी पूज्य डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जी ने हम सबको दी थी।' 

सनातन संस्कृति 

संघ प्रमुख ने कहा-'सनातन संस्कृति–मेरे भारत की पवित्र भूमि पर जन्मी है, हिमालय से लेकर सागर तक.इसलिए हम सब भारतीयों की जिम्मेदारी है कि सनातन संस्कृति उदघोष, इसका प्रचार पूरे विश्व में,पूरी जागृत अवस्था के साथ स्वयं अपनाएं और मानवकल्याण के लिए इसके प्रचार-प्रसार में जुटना चाहिए।

दूरियां और दुश्मनी बढ़ानेवालों का प्रतिकार

मोहन भागवत ने कहा-' समाज के विभिन्न वर्गों में स्वार्थ व द्वेष के आधार पर दूरियां और दुश्मनी बनाने का काम स्वतन्त्र भारत में भी चल रहा है। उनके बहकावे में न फ़ंसते हुए,उनकी भाषा,पंथ,प्रांत,नीति कोई भी हो,उनके प्रति निर्मोही होकर निर्भयतापूर्वक उनका निषेध व प्रतिकार करना चाहिए। शासन व प्रशासन के इन शक्तियों के नियंत्रण व निर्मूलन के प्रयासों में हमको सहायक बनना चाहिए। समाज का सबल व सफल सहयोग ही देश की सुरक्षा व एकात्मता को पूर्णत: निश्चित कर सकता है।' 

मातृभाषा में शिक्षा 

उन्होंने शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा-'मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने वाली नीति बननी चाहिए यह अत्यंत उचित विचार है, और नयी शिक्षा नीति के तहत उस ओर शासन/ प्रशासन पर्याप्त ध्यान भी दे रहा है। नयी शिक्षा नीति के कारण छात्र एक अच्छा मनुष्य बने, उसमें देशभक्ति की भावना जगे, वह सुसंस्कृत नागरिक बने यह सभी चाहते हैं।'

 

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