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पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत में तीन दिन का राजकीय शोक, PM मोदी ने जताया दुख

Edited By: Amar Deep Published : Apr 21, 2025 11:13 pm IST, Updated : Apr 21, 2025 11:13 pm IST

पोप फ्रांसिस के निधन के बाद भारत में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा कर दी गई है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। वहीं पीएम मोदी ने पोप फ्रांसिस के निधन पर दुख व्यक्त किया है।

तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा।- India TV Hindi
Image Source : AP तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा।

ईसाइयों के सबसे बड़े धर्म गुरु पोप फ्रांसिस का सोमवार की सुबह निधन हो गया। इसके बाद से पूरी दुनिया भर में शोक की लहर दौड़ गई। भारत में भी पोप फ्रांसिस के निधन पर राजनेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी और दुख व्यक्त किया। वहीं अब सरकार ने पोप फ्रांसिस के निधन के बाद तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इन तीनों तक भारत के राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका कर रखा जाएगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार का आधिकारिक मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। 

आधा झुका रहेगा राष्ट्रीय ध्वज

दरअसल, गृह मंत्रालय (MHA) ने पोप फ्रांसिस के निधन पर उनके सम्मान के रूप में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। पोप फ्रांसिस का आज सोमवार की सुबह को निधन हो गया। ऐसे में उनके सम्मान के रूप में, पूरे भारत में तीन दिवसीय राजकीय शोक मनाया जाएगा। इस दौरान मंगलवार, 22 अप्रैल और बुधवार 23 अप्रैल को दो दिन का राजकीय शोक रहेगा। वहीं पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के दिन एक दिन का अतिरिक्त राजकीय शोक भी रहेगा। राजकीय शोक की अवधि के दौरान पूरे भारत में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जहां राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से फहराया जाता है। इसके अलावा कोई आधिकारिक मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं होगा।

पीएम मोदी ने व्यक्त किया शोक

बता दें कि पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा, "परम पूज्य पोप फ्रांसिस के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। दुख और स्मरण की इस घड़ी में, वैश्विक कैथोलिक समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। पोप फ्रांसिस को दुनिया भर के लाखों लोग हमेशा करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में याद रखेंगे। छोटी उम्र से ही उन्होंने प्रभु ईसा मसीह के आदर्शों को साकार करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया था। उन्होंने गरीबों और वंचितों की लगन से सेवा की। जो लोग पीड़ित थे, उनके लिए उन्होंने आशा की भावना जगाई। मैं उनके साथ अपनी मुलाकातों को याद करता हूं और समावेशी और सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से बहुत प्रेरित हुआ। भारत के लोगों के प्रति उनका स्नेह हमेशा संजोया जाएगा। उनकी आत्मा को ईश्वर की गोद में शांति मिले।"

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