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ब्रिटेन के बाद अब पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर दिल्ली में होगा जनमत संग्रह!

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 24, 2016 06:26 pm IST,  Updated : Jun 24, 2016 06:26 pm IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर दिल्ली में जल्द ही जनमत संग्रह होगा।

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नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर दिल्ली में जल्द ही जनमत संग्रह होगा। आम आदमी पार्टी (आप) नेता ने ट्वीट किया, "ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह के बाद पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर दिल्ली में जल्द जनमत संग्रह होगा।" केजरीवाल ने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी और न ही यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह का जनमत संग्रह कौन कराएगा।

आप नेता बार-बार यह मांग करते रहे हैं कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। वर्तमान में दिल्ली सरकार की ताकत सीमित है, क्योंकि शहर में कानून-व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण विषय केंद्र सरकार के अधीन है।

52 फीसदी लोग BREXIT तो 48 फीसद BREMAIN के साथ

इससे पहले ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में बने रहने या इसकी सदस्यता से बाहर निकलने को लेकर गुरुवार को कराए गए जनमत संग्रह में करीब 52 फीसदी मतदान 'ब्रेक्सिट' के पक्ष में हुआ है, जबकि 48 प्रतिशत वोट 'ब्रिमेन' के लिए पड़े हैं। 'बीबीसी' की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने इस जनमत संग्रह के जरिये 43 वर्षो बाद ईयू की सदस्यता से हटने के पक्ष में वोट किया है।

'रीमेन' अभियान के पक्ष में 15,692,092 वोट पड़े, जबकि 'लीव' के पक्ष में इससे 6,835,512 अधिक वोट पड़े। बीबीसी ने भारतीय समयानुसार सुबह 9.40 बजे 'ब्रेक्सिट' के पक्ष में वोट पड़ने का अनुमान जताया था। धुर दक्षिणपंथी यूके इंडीपेंडेंस पार्टी (यूकेआईपी) के नेता नीगेल फेरेज ने बहुत पहले ही जीत की घोषणा करते हुए कहा था, यह सपना देखने की हिम्मत दिखाइए कि स्वतंत्र ब्रिटेन में सूर्योदय हो रहा है, 23 जून हमारा स्वतंत्रता दिवस होगा।

इस मतदान का फैसला वर्ष 1975 में हुए उस जनादेश को उलट रहा है, जिसमें ब्रिटेन ने यूरोपियन इकोनॉमिक कम्यूनिटी का सदस्य बने रहने के लिए मतदान किया था। यह समूह बाद में यूरोपीय संघ बन गया था। इस जनमत संग्रह का परिणाम ब्रिटेन की सरकार के लिए कानूनी तौर पर बाध्यकारी तो नहीं है लेकिन डेविड कैमरन ने बार-बार यही वादा किया है कि जनता की इच्छा को स्वीकार किया जाएगा।

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