Highlights
- चंद्रबाबू नायडू ने सदन में कहा कि YSR कांग्रेस के सदस्यों द्वारा उनके खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे अपशब्दों से वह आहत हैं।
- विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम ने जब उनका माइक संपर्क काट दिया, तब भी नायडू ने बोलना जारी रखा।
- 2019 में हुए विधानसभा चुनावों में तेलुगूदेशम पार्टी को वाईएसआर कांग्रेस के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था।
अमरावती: तेलुगू देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को संकल्प लिया कि सत्ता में लौटने तक वह आंध्र प्रदेश विधानसभा सदन में कदम नहीं रखेंगे। भावुक हुए नेता विपक्ष ने सदन में कहा कि सत्तारूढ़ YSR कांग्रेस के सदस्यों द्वारा उनके खिलाफ लगातार इस्तेमाल किए जा रहे अपशब्दों से वह आहत हैं। नायडू ने कहा, ‘पिछले 2.5 साल से मैं अपमान सह रहा हूं लेकिन शांत रहा। आज उन्होंने मेरी पत्नी को भी निशाना बनाया है। मैं हमेशा सम्मान के लिए और सम्मान के साथ रहा। मैं इसे और नहीं सह सकता।’
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विधायकों के साथ बैठक में भावुक हुए चंद्रबाबू नायडू
विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम ने जब उनका माइक संपर्क काट दिया, तब भी नायडू ने बोलना जारी रखा। सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने नायडू की टिप्पणी को ‘नाटक’ करार दिया। कृषि क्षेत्र पर एक संक्षिप्त चर्चा के दौरान सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने निराशा व्यक्त की। बाद में उन्होंने अपने कक्ष में अपनी पार्टी के विधायकों के साथ अचानक बैठक की, जहां वह कथित तौर पर अत्यंत भावुक हो गए। TDP के स्तब्ध विधायकों ने नायडू को सांत्वना दी जिसके बाद वे सभी सदन में वापस आ गए।
2019 में बुरी तरह हारी थी तेलुगुदेशम पार्टी
नायडू ने तब अपने फैसले की घोषणा की और कहा, ‘सत्ता में लौटने तक’ वह विधानसभा सदन में कदम नहीं रखेंगे। बता दें कि 2019 में हुए विधानसभा चुनावों में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगूदेशम पार्टी को जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था। 175 सीटों वाली विधानसभा में जगन रेड्डी की पार्टी को जहां 151 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं नायडू की टीडीपी सिर्फ 23 सीटों पर सिमट गई थी। एक सीट पवन कल्याण की जनसेना के खाते में गई थी।2014 के चुनावों में टीडीपी को 102 और वाईएसआर कांग्रेस को 67 सीटें मिली थीं।