बेंगलुरु/मुंबई/दिल्ली: कर्नाटक का सियासी नाटक अब लंबा खिंचता जा रहा है और कोई नहीं कह सकता कि इसका पटाक्षेप कब होगा। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बावजूद कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने संकट का सामना कर रहे सत्तारूढ़ कांग्रेस-JDS गठबंधन के बागी विधायकों के इस्तीफे पर फौरन कोई फैसला करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनसे बिजली की गति से काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। सूबे का सियासी ड्रामा शुक्रवार को भी जारी रहने के पूरे आसार हैं, इसलिए इससे जुड़ी खबरों और अपडेट्स के लिए आप हमारे साथ बने रहें:
कर्नाटक के सियासी हालात पर बोले राहुल गांधी, कहा – भाजपा पैसे के दम पर गिराती है प्रदेशों के सरकारें। राहुल गांधी ने कहा वो ऐसा करते हैं, हम ऐसा नॉर्थ ईस्ट में भी देख चुके हैं।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में कहा, “हमें विश्वास है इसलिए इसलिए हम विश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहे हैं। बीजेपी डरती है क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी पार्टी में काली भेड़ें हैं।”
अपने विधायकों को बेंगलुरु के होटल रामादा में लेकर जा रही है भाजपा।
कांग्रेस के बागी विधायक बीसी पाटिल ने मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर के बाहर कहा,“हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पालन करेंगे। हमारा फैसला अंतिम है, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि अगर स्पीकर ने मंजूरी दी तो मैं सदन में बहुमत साबित करने को तैयार हूं
बागी विधायकों की याचिका पर अगली सुनवाई अब मंगलवार 16 जुलाई को होगी, कोर्ट ने चीजों को तब तक यथास्थिति रखने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि 16 जुलाई तक स्पीकर बागी विधायकों पर कोई फैसला नहीं ले पाएंगे।
कर्नाटक संकट: विधानसभा अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष का पद संवैधानिक है।
कर्नाटक संकट: असंतुष्ट विधायकों ने न्यायालय से कहा कि अध्यक्ष को इस्तीफे स्वीकार करने के संबंध में कोई छूट प्राप्त नहीं है।
कर्नाटक संकट: विधायकों ने कहा कि इस्तीफे के मामले को लंबित रखने का मकसद उन्हें पार्टी व्हिप के प्रति बाध्यकारी बनाना है।
विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने न्यायालय को बताया कि अध्यक्ष ने कर्नाटक के 10 असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफे पर फैसला नहीं लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के विधानसभा अध्यक्ष को फटकार लगाई है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि क्या वह सुप्रीम कोर्ट की ताकत को चुनौती दे रहे हैं।
बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हुए तो 105 विधायकों वाली बीजेपी अपने दम पर ही सरकार बना लेगी। 2 निर्दलीय विधायक भी उसके साथ हैं।
16 बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हुआ तो विधानसभा की स्ट्रेंथ 208 रह जाएगी और ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 105 का हो जाएगा। ऐसे में कुमारस्वामी सरकार को सिर्फ 100 विधायकों का समर्थन ही रह जाएगा और वह अल्पमत में आ जाएगी।
कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं। जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार को बागी विधायकों को मिलाकर कुल 116 का समर्थन हासिल था। 2 निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है और वे बीजेपी के पाले में चले गए हैं।
विपक्षी पार्टी बीजेपी ने आज सुबह 11 बजे तक इंतजार करने का फैसला किया है अगर स्पीकर की तरफ से आज कोई दिशा-निर्देश नहीं मिलते हैं बीजेपी राज्यपाल के पास जा सकती है।
आज सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों और स्पीकर की याचिका पर सुनवाई होगी। बागी विधायकों ने स्पीकर पर उनके इस्तीफे को मंजूर करने में देरी का आरोप लगाया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को हिदायत दी थी कि वह विधायकों से मिलें और उनके इस्तीफे पर फैसला लें।
हालांकि विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने कहा कि इस्तीफे ‘सही प्रारूप’ में हैं लेकिन उन्हें इसकी पड़ताल करनी होगी कि क्या ये ‘स्वैच्छिक और वास्तविक’ हैं। इसके लिए उन्होंने और समय मांगा है।
कांग्रेस के 13 और JDS के 3, इस तरह कुल 16 विधायकों के इस्तीफे के चलते राज्य में इन दोनों दलों की गठबंधन सरकार गिरने के कगार पर पहुंच गई है।
कर्नाटक के बागी विधायक देर रात को एक बार फिर मुंबई के होटल पहुंच गए। उन्होंने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष से मुलाकात की थी।
कर्नाटक में गठबंधन सरकार पर मंडराते खतरे के बीच मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के बेहद करीबी मंत्री ने गुरुवार को एक गेस्ट हाउस में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
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