नई दिल्ली: बसपा प्रमुख मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को आदेश दिया है कि वह उस रसोइये को खोजकर लाएं जिसने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए तब खाना पकाया था जब वे वाराणसी के जोगियापुर गांव आए थे और दलितों के घर भोजन किया था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मायावती को भरोसा है कि रसोइया दलित नहीं था बल्कि कोई उच्च जाति का था। पार्टी के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. रामकुमार कुरील ने ऐसे दिशानिर्देश जारी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि जल्द ही वह इस बात का पता लगा लेंगे।
कुरील ने दावा किया कि अमित शाह के साथ 250 लोग आए थे और केवल 50 लोगों ने ही भोजन किया। बाकी ने भोजन नहीं किया जो भगवा ब्रिगेड की जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है। कुरील ने कहा कि जहां अमित शाह ने लंच किया वहां अधिकतर भिंड समुदाय के लोग रहते हैं जो अति पिछड़ा वर्ग से संबंध रखते हैं और दलित नहीं हैं। उन्होंने कहा, शाह के साथ केवल कुछ दलित थे जिन्होंने उनके साथ खाना खाया जिससे एक राजनैतिक संदेश जा सके।
बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह दुखद है कि दलितों के साथ भोजन को एक कार्य की तरह लिया जा रहा है तांकि दलित वोटों का चुनावों में फायदा उठाया जा सके। इससे पहले मायावती ने भाजपा अध्यक्ष पर हमला बोलते हुए कहा था कि दलितों के साथ भोजन करना एक ड्रामा है। चुनावी वर्ष को ध्यान में रखते हुए यह नौटंकी की जा रही है।
मायावती ने कहा था कि जब अमित शाह दलितों के साथ दिन का भोजन कर रहे थे तभी भाजपा शासित राज्य हरियाणा में बसपा संस्थापक और दलित नेता कांशीराम की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की जा रही थी।
31 मई मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे थे और वहां काशी के सेवापुरी ब्लॉक के जोगियापुर गांव में दलितों से साथ भोजन किया था। भाजपा के मीडिया प्रभारी संजय भारद्वाज ने बताया कि भाजपा प्रमुख ने बिंद के परिजनों के साथ जमीन पर बैठकर लौकी का कोफ्ता, नेनुआ की सब्जी और तबे की रोटियों का लुत्फ उठाया।