नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह करो या मरो की स्थिति वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा का चेहरा हो सकते हैं। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके लिए वह खुद तैयार होंगे या नहीं। पार्टी नेतृत्व राजनाथ के समक्ष इस आशय का प्रस्ताव पहले ही रख चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सत्तासीन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के मुकाबले अनुभवी चेहरे के रूप में राजनाथ सिंह को पेश किया जा सकता है।
प्रदेश के सामाजिक समीकरण को साधने के लिए पार्टी ने जातिविशेष में असर रखने वाले कुछ अन्य पुराने चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। पार्टी के अतिविशिष्ट सूत्र ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में राजनाथ चुनावी चेहरा के लिए आलाकमान की न सिर्फ पहली पसंद हैं, बल्कि उनके समक्ष इस आशय का प्रस्ताव भी रखा जा चुका है।
हालांकि इस मामले में फिलहाल अंतिम फैसला नहीं किया गया है, और इलाहाबाद में होने वाली पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है, लेकिन कार्यकारिणी के लिए बनाए गए पोस्टरों में राजनाथ के चेहरे को अहमियत दी गई है, और गौरतलब है कि सहारनपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राजनाथ सिंह भी मौजूद थे।
सूत्रों ने बताया है कि राज्य में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर अभी चर्चा होना बाकी है, लेकिन इस बात के आसार हैं कि राजनाथ सिंह को पेश किया जा सकता है। चुनाव प्रचार के लिए तय किए जा रहे कार्यक्रमों में भी पीएम और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा राजनाथ सिंह की कई रैलियां आयोजित करने का विचार है।
अगर राजनाथ सिंह ने नेतृत्व का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया तो पार्टी यूपी में असम की तर्ज पर चुनाव मैदान में उतरेगी। पार्टी ने असम में खेल राज्य मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को चेहरा बनाया था। इस दौरान उन्हें मंत्री पद पर भी बनाए रखा गया था। राजनाथ की हां के बाद पार्टी उत्तर प्रदेश में भी यही फार्मूला अपना सकती है।