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मॉब लिंचिंग पर संसद में लाया जाए कड़ा कानून, मौलान अरशद मदनी बोले- सरकारें नहीं हैं गंभीर

 Reported By: Shoaib Raza, Edited By: Avinash Rai
 Published : Jun 22, 2024 04:09 pm IST,  Updated : Jun 22, 2024 06:31 pm IST

जमीयत उलेना ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अलीगढ़ और छत्तीसगढ़ में हुई मॉब लिंचिंग पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकारें इसे लेकर सीरियस नहीं हैं। इसपर संसद में कड़ा कानून लाया जाना चाहिए।

Maulana Arshad Madani said- Governments are not serious on a strict law on mob lynching- India TV Hindi
मौलान अरशद मदनी Image Source : FILE PHOTO

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने छत्तीसगढ़ और अलीगढ़ में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गहरा दुख और सख्त गुस्सा प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान लोकसभा चुनाव में देश के अधिकतर लोगों ने सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति को खारिज कर दिया है, मगर इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों से संप्रदायवादियों ने लोगों के दिलों-दिमाग में नफरत का जो जहर भरा है वो पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। छत्तीसगढ़ और अलीगढ़ की यह घटनाएं इसका प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि एक बार फिर बदमाशों ने दरिंदगी और क्रूरता का प्रदर्शन करके मानवता के दामन को दागदार कर दिया है। 

मॉब लिंचिंग पर क्या बोले मौलाना मदनी?

मौलाना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बावजूद इस प्रकार की दुखद घटनाओं का सिलसिला रुक नहीं रहा है। जबकि 17 जुलाई 2018 को इस प्रकार की घटनाओं पर क्रोध व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कोई व्यक्ति कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। अदालत ने इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र को अलग से कानून बनाने का निर्देश दिया था। अब अगर इसके बाद भी इस प्रकार की अमानवीय घटनाएं हो रही हैं तो इसका साफ मतलब है कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें कानून का कोई भय नहीं है। उन्हें यह भी विश्वास है कि अगर पकड़े भी गए तो उनका कुछ नहीं होने वाला, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी संसद में अलग से कोई कानून नहीं लाया गया। कुछ राज्यों को छोड़कर किसी ने भी भीड़ द्वारा हिंसा के खिलाफ कानून नहीं बनाया।

"मॉब लिंचिंग सामाजिक नहीं, राजनीतिक समस्या है?"

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निकट आरंग नामक स्थान पर बदमाशों के एक समूह ने पशुओं से लदे एक ट्रक को रोक लिया और ड्राईवर समेत अन्य दो युवकों को इतना पीटा कि उन्होंने दम तोड़ दिया। उनका संबंध उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और शामली जिले से है। उनमें से एक की घटना स्थल पर मृत्यु हो गई थी जबकि अन्य ने अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ दिया था। उनके नाम चांद मियां और गुड्डू खान हैं। जबकि तीसरे युवक सद्दाम खान की भी बाद में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। मौलाना मदनी ने कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा सामाजिक नहीं, एक राजनीतिक समस्या है और इसे राजनीतिक रूप से ही हल किया जा सकता है। इसलिए अब समय आ गया है कि स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दल इसके खिलाफ खुल कर मैदान में आएं और भीड़ द्वारा हिंसा के खिलाफ कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव डालें। 

"केंद्र और राज्य दोनों गंभीर नहीं"

मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि ताजा घटना से इस बात की पुष्टि हो गई कि भीड़ द्वारा हिंसा को रोकने के लिए न तो केंद्र गंभीर है और न ही राज्य। बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति में इसके खिलाफ पूरी ताकत के साथ धर्मनिरपेक्ष दलों को आवाज उठानी चाहिए। आखिर इस तरह कब तक मुट्ठी भर लोग कानून को हाथ में लेकर एक विशेष वर्ग को अपनी क्रूरता का शिकार बनाते रहेंगे? उन्होंने आगे कहा कि अखबारी रिपोर्टों के अनुसार ट्रक पर भैंसें लदी हुई थीं। जबकि भैंसों की खरीद-फरोख्त पर रोक नहीं है, फिर सांप्रदायिक तत्वों ने ऐसा क्यों किया? इसका जवाब बहुत आसान है कि धर्म और नफरत के आधार पर ऐसा किया। मौलाना मदनी ने बकरईद के अवसर पर उड़ीसा के बालासोर में होने वाली घटना पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश भर में सांप्रदायिक तत्वों का मनोबल ऊंचा है, क्योंकि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं होती। 

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