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अब सरकारी मेले के रूप में मनाया जाएगा 'ददरी मेला', जानें क्यों है प्रसिद्ध

 Edited By: Shashi Rai @km_shashi
 Published : Nov 17, 2022 02:30 pm IST,  Updated : Nov 17, 2022 02:30 pm IST

लंपी रोग फैलने की आशंका के मद्देनजर इस बार पशु मेला नहीं लगाये जाने से मेले पर असर पड़ा है, लेकिन रोजाना उमड़ रही लोगों की भीड़ इस मेले को जीवंत बनाए हुए है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : फाइल फोटो

यूपी के बलिया में हर साल लगने वाले ऐतिहासिक ददरी मेले को अगले साल से सरकारी मेला घोषित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह ने यह जानकारी दी। इस साल आठ नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के साथ शुरू हुआ यह मेला 30 नवंबर को समाप्त होगा। सिंह ने बताया कि सरकार अगले साल से इसे सरकारी मेला घोषित करेगी और इसके आयोजन के लिए ददरी मेला प्राधिकरण बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में अपने बलिया दौरे में महर्षि भृगु गलियारे के लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा था। उन्होंने कहा कि अगले साल से यह मेला और भव्य स्वरूप में दिखाई देगा। 

ददरी मेला का इतिहास

बलिया के ददरी मेला का इतिहास बहुत पुराना है और इस मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। बलिया में गंगा और सरयू के मिलन का साक्षी ददरी मेला हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है। लंपी रोग फैलने की आशंका के मद्देनजर इस बार पशु मेला नहीं लगाये जाने से मेले पर असर पड़ा है, लेकिन रोजाना उमड़ रही लोगों की भीड़ इस मेले को जीवंत बनाए हुए है। ददरी मेले के आयोजन के संबंधित विभिन्न मान्यताएं हैं। 

यहीं महर्षि भृगु को श्राप से मुक्ति मिली 

एक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु को पैर से मारने के बाद महर्षि भृगु को श्राप से मुक्ति इसी क्षेत्र में ही मिली थी। ददरी मेले पर आधा दर्जन से ज्यादा किताबें लिखने वाले इतिहासकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि ऐसी भी मान्यता है कि महर्षि भृगु ने अपने शिष्य दर्दर मुनि के जरिए अयोध्या से सरयू नदी को बलिया लाकर कार्तिक पूर्णिमा के दिवस ही गंगा और सरयू नदी का संगम कराया था। उन्होंने बताया कि इसी तट पर दर्दर मुनि के नेतृत्व में यज्ञ हुआ था, जो एक माह तक चला था। 

चीनी यात्री फाह्यान की किताब में मेले का जिक्र

टाउन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश सिन्हा ने बताया कि ददरी मेले की ऐतिहासिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चीनी यात्री फाह्यान ने इस मेले का जिक्र अपनी एक पुस्तक में किया है। ददरी मेले का पशु बाजार देश एवं दुनिया में मशहूर है, लेकिन इस बार लंपी संक्रमण के चलते इसका आयोजन नहीं किया गया है। 

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