Kashmir Youth Join Indian Army: भारतीय सेना को आज (शनिवार को) जम्मू-कश्मीर से 538 नए सैनिक मिल गए हैं। 24 हफ्तों की कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, उन्होंने देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने की शपथ ली, जिससे उनके परिवारों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। इन सैनिकों में से 500 से ज्यादा कश्मीर के रहने वाले हैं। श्रीनगर में जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (JAKLI) रेजिमेंटल सेंटर का परेड ग्राउंड आज सेना की ईमानदारी और देशभक्ति की भावना से गूंज उठा, जब 538 अग्निवीरों के 7वें बैच ने भारतीय सेना की पुरानी परंपराओं को निभाते हुए अपनी पासिंग-आउट मार्च की।
श्रीनगर में हुई भव्य पासिंग-आउट परेड
इस शानदार पासिंग-आउट परेड की शोभा बढ़ाने और समारोह की भव्यता में चार चांद लगाने के लिए कई खास मेहमान मौजूद थे, जिनमें 16 कोर के GOC, लेफ्टिनेंट जनरल पी. के. मिश्रा और सेना के दूसरे बड़े अधिकारी शामिल थे, जिनकी मौजूदगी ने इस मौके को और भी खास बना दिया।
अग्निवीरों के माता-पिता के लिए गर्व का पल
जब अधिकारियों ने इस खास मौके पर इन सैनिकों को सम्मानित किया, तो उनके माता-पिता अपने बेटों को सम्मानित होते देख गर्व से भर उठे। यह एक बहुत ही भावुक पल था, जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके बच्चों ने आज देश के लिए सबसे बड़ा बलिदान देने का वादा किया है।
महज रस्मी दिखावा नहीं है पासिंग-आउट परेड
यह परेड सिर्फ एक रस्मी दिखावा नहीं थी। यह एक ऐलान था, मुश्किलों का सामना करते हुए भी भारत के मजबूत इरादों का एक जोरदार सबूत। हाल में हुए आतंकवादी हमलों के बाद, इस परेड को देश की ताकत और एकता के एक मजबूत प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।
कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहे कश्मीरी युवा
गर्व से भरे माता-पिता को उनके अपने अनकहे बलिदानों और अपने बेटों को देश की सेवा के लिए समर्पित करने के लिए खास सम्मान के मेडल दिए गए। जब सलामी की गूंज ठंडी हवा में गूंजी और तिरंगा नीले आसमान के नीचे शान से लहराया, तो संदेश साफ था- जम्मू और कश्मीर के नौजवान सिर्फ भविष्य की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं; वे कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं। उनके दिलों में देश के लिए जोरदार धड़कनें धड़क रही हैं।
पासिंग-आउट परेड में शामिल सैनिकों के परिवार भी इस मौके पर बहुत खुश नजर आए। इस परेड में भाई, बेटे और पति सभी शामिल थे। हर किसी को गर्व का गहरा एहसास हुआ, यह सोचकर कि उनके सपने आज आखिरकार सच हो गए हैं।