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जम्मू-कश्मीर में 36 साल बाद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की प्रक्रिया शुरू, वापस ली जा रही हैं हड़पी हुई जमीनें

 Reported By: Manzoor Mir Edited By: Subhash Kumar
 Published : Mar 31, 2026 11:45 pm IST,  Updated : Mar 31, 2026 11:59 pm IST

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में 36 साल बाद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कश्मीरी पंडितों की हड़पी हुई जमीनों को वापस हासिल किया जा रहा है।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : PTI

जम्मू-कश्मीर में 36 साल बाद कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक तरफ खंडहर में तब्दील हो चुके मंदिरों को रेनोवेट करके दोबारा खोला जा रहा है। तो वहीं, दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर की सरकार ने 1990 में हड़प की गई कश्मीरी पंडितों की 3700 कनाल जमीन को वापस पाने का दावा किया है। कश्मीरी पंडितों ने सरकार की तरफ से उठाए गए इस कदम का स्वागत किया है।

कश्मीरी प्रवासियों की जमीन वापस ली गई

जम्मू-कश्मीर सरकार के अनुसार, प्रशासन की लगातार कोशिशों से अब तक कश्मीर घाटी के 10 जिलों में कश्मीरी प्रवासियों की कुल 3,729 कनाल और चार मरला (188.75 हेक्टेयर) जमीन सफलतापूर्वक वापस ली गई है और उन्हें लौटा दी गई है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि हड़प ली गई जमीन और मंदिर की संपत्ति हजारों कनाल की जमीन है। मुख्यमंत्री अगर ये दावा करते हैं कि उन लोगों ने 3700 कनाल जमीन पुनर्प्राप्ति की है तो ये एक अच्छी बात हैं, लेकिन ये जमीन किस-किस को मिली है ये जानना भी जरूरी है।

लाखों कश्मीरी पंडितों ने किया था पलायन

आपको बता दें कि जम्मू और कश्मीर में 1989 में शुरू हुए आतंकवाद के साथ ही लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर बार और अपनी जमीन जायदाद छोड़ कर चले गए थे। आतंकवाद के इस दौर में कुछ लोगों ने तब अपनी संपत्तियों को बेच दिया, कुछ लोग अपना सब कुछ छोड़कर कश्मीर से पलायन कर गए। कश्मीरी पंडितों के अनुसार, वक्त गुजरने के साथ-साथ उनकी जमीन मंदिर और ट्रस्ट की संपत्तियों पर कुछ लोगों ने नाजायज कब्जा कर लिया जहा आज बड़े-बड़े अस्पताल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल बनाए गए हैं।

कश्मीरी पंडित क्या बोले?

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि ये एक अच्छी बात है कि कश्मीर का माहौल पहले से बहुत अच्छा है। कश्मीरी मुसलमानों का सहयोग मिल रहा है। खंडहर में तब्दील हुए मंदिरों का नवीनीकरण हो रहा है। खास बात ये है कि हाल ही में 36 साल बाद श्रीनगर का रघुनाथ मंदिर दोबारा पूजा अर्चना के लिए खुल गया और उमर सरकार का ये दावा है कि 3700 कनाल जमीन वापस ले ली गई है। अभी हजारों कनाल जमीन ऐसी हैं जहां बड़े-बड़े मॉल, अस्पताल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बन गए हैं। उसको वापस लाने की जरूरत है। तभी यह संभव है कि कश्मीरी पंडित अपने घरों को लौट सकेंगे।

सरकार बुलडोजर का इस्तेमाल करे

वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने मुख्यमंत्री के इस दावे पर कहा कि अगर वाकई उमर अब्दुल्ला की सरकार ने 3700 कनाल जमीन वापस ले ली है तो ये उन कश्मीरी पंडितों के लिए अच्छी खबर है जिनकी जमीन वापस मिल गई है। उन्हें पब्लिकली ये बताना चाहिए कि किस-किस को अपनी जमीन वापस मिली है।" अल्ताफ ठाकुर ने कहा आगे कहा- "1990 में आतंकवाद और अलगाववाद में हजारों कनाल जमीन और मंदिर की संपत्ति को गन पॉइंट पर हड़प लिया गया जहां आज बड़े-बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बने हुए हैं। सरकार को चाहिए कि उस जमीन को दोबारा हासिल करने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया जाए।

एलजी प्रशासन और उमर सरकार एक ट्रैक पर

आपको बता दें कि कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए एलजी प्रशासन और उमर सरकार एक ट्रैक पर चल रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद कश्मीर में 300 से ज्यादा ऐसे मंदिर हैं जिन्हे दोबारा नए से तामीर किया गया है जो आतंकवाद के दौर में तबाह हुए थे। मंदिरों को रिनोवेट करना और हड़प किए गए जमीन को दोबारा हासिल करने का मकसद भी यही है कि कश्मीरी पंडित वापस अपने घर को लौटे। इसका इंतजार न सिर्फ सरकार बल्कि कश्मीरी मुसलमान भी बेसब्री से कर रहे हैं। लेकिन जरूरी है अभी कुछ और खास कदम उठाने की जिससे कश्मीरी पंडितों का भरोसा बहाल हो सके।

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