श्रीनगर: केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो संगठनों अवामी एक्शन कमेटी (AAC) और जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन पर प्रतिबंध लगाया था। अब इस मामले पर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इन पर प्रतिबंध लगाना गलत है। मीरवाइज उमर खुद पीड़ित हैं, उनके पिता शहीद हुए थे। मसरूर अंसारी भी इसी तरह के हैं। ये सामाजिक राजनीतिक संगठन हैं। भारत सरकार मीरवाइज के कद को समझती है और उन्हें जेड सुरक्षा देती है और फिर आप उनके संगठन पर प्रतिबंध लगा देते हैं। बल प्रयोग की नीति काम नहीं करेगी।
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मुफ्ती ने कहा, 'ऐसा लगता है कि भारत सरकार उन्हें ब्लैकमेल कर रही है। आप उन्हें सुरक्षा देते हैं और फिर उनके संगठन पर प्रतिबंध लगा देते हैं। मरहम लगाने की जरूरत है। आप ऐसे मुस्लिम नेता के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हैं और इससे लोगों को दुख होता है। उनके पिता ने अपनी जान कुर्बान कर दी और मुझे इस बात का दुख है। चुनी हुई सरकार हमारी रक्षा करने के लिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। लोकप्रिय सरकार होने के बावजूद वे चुप हैं। इससे मामला और उलझ रहा है।'
क्या हुआ था?
दरअसल केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो संगठनों अवामी एक्शन कमेटी (AAC) और जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके लिए गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी। गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर स्थित अवामी एक्शन कमेटी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत तत्काल प्रभाव से एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया था।
इन दो संगठनों में उमर फारूक की अध्यक्षता वाली अवामी एक्शन कमेटी (AAC) और मसरूर अब्बास अंसारी नीत जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन (JKIM) शामिल हैं। केंद्र सरकार ने एएमसी और जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन दोनों संगठन को अगले पांच सालों के लिए प्रतिबंध लगा दिया। गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इसके सदस्य केंद्र शासित प्रदेश में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकवादी गतिविधियों और भारत विरोधी प्रचार में शामिल रहे हैं।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया कि यह संगठन गैरकानूनी गतिविधियों में भी संलिप्त है, जो देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है। एक अन्य अधिसूचना में मंत्रालय ने कहा कि जेकेआईएम गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है, जो देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है।