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“बाबा आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?” हेमंत सोरेन ने पिता के निधन पर लिखी भावुक कविता

 Published : Aug 05, 2025 12:48 pm IST,  Updated : Aug 05, 2025 01:01 pm IST

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे कठिन समय बताया।

पिता शिबू सोरेन के साथ हेमंत सोरेन- India TV Hindi
पिता शिबू सोरेन के साथ हेमंत सोरेन। फाइल फोटो Image Source : X@HEMANTSORENJMM

रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को अपने पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक व पूर्व सीएम शिबू सोरेन को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। एक्स हैंडल पर भावुक कविता लिखकर पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन याद करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि वह अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुज़र रहे हैं क्योंकि न केवल उनके सिर से पिता का साया उठ गया है, बल्कि झारखंड की आत्मा का एक स्तंभ भी चला गया है। बता दें कि हेमंत सोरेन के पिता का निधन सोमवार (4 अगस्त) को नई दिल्ली में निधन हो गया था।

81 वर्षीय झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का किडनी संबंधी समस्याओं का इलाज चल रहा था। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में चल रहा था। 

हेमंत सोरेन ने लिखी है ये कविता

मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुज़र रहा हूं। 

मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया,
झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया।

मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था 
वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे,
और उस जंगल जैसी छाया थे
जिसने हजारों-लाखों झारखंड़ियों को
धूप और अन्याय से बचाया।

मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी।
नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे,
जहाँ गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी।

बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया 
जमींदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी
जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया।

मैंने उन्हें देखा है 
हल चलाते हुए,
लोगों के बीच बैठते हुए,
सिर्फ भाषण नहीं देते थे,
लोगों का दुःख जीते थे।

बचपन में जब मैं उनसे पूछता था:
“बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?”
तो वे मुस्कुराकर कहते:

“क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा 
और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।”

वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी,
न संसद ने दी -
झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी।

‘दिशोम’ मतलब समाज,
‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए।
और सच कहूं तो 
बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया,
हमें चलना सिखाया।

बचपन में मैंने उन्हें सिर्फ़ संघर्ष करते देखा, बड़े बड़ों से टक्कर लेते देखा 
मैं डरता था 
पर बाबा कभी नहीं डरे।
वे कहते थे:
“अगर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना अपराध है,
तो मैं बार-बार दोषी बनूंगा।”

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