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झारखंड के सभी थानों में लगाए जाएं सीसीटीवी कैमरे, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश

 Published : Nov 19, 2025 10:57 am IST,  Updated : Nov 19, 2025 11:02 am IST

झारखंड के सभी थानों में CCTV कैमरे लगाए जाने का हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और निविदा जारी करने की प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी हो जाए।

सांकेतिक फोटो- India TV Hindi
सांकेतिक फोटो Image Source : PEXELS

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने  का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना दादेल और पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा की उपस्थिति में यह निर्देश दिया गया। कोर्ट ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और निविदा प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी हो जाए। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को 5 जनवरी तक उच्च न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

यह मामला पश्चिम बंगाल के शौभिक बनर्जी द्वारा दायर एक याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष रखा गया था। बनर्जी चेक बाउंस होने के एक मामले में धनबाद के बैंक मोड़ पुलिस थाने में पेश हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्रतिद्वंद्वियों, जिन्होंने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया था, के कहने पर पुलिस ने उन्हें दो दिनों तक जबरन थाने में रखा।

कोर्ट ने सभी थानों में कैमरों की स्थिति पर मांगी रिपोर्ट

उच्च न्यायालय ने आरोपों की पुष्टि के लिए थाने का सीसीटीवी फुटेज मांगा। लेकिन, पुलिस ने अदालत को बताया कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे का डेटा दो दिनों में अपने आप डिलीट हो जाता है। इस मामले पर कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की और सरकार से सभी थानों में कैमरों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी। 

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के प्रबंधन के लिए एक नियमित अधीक्षक की नियुक्ति करने का निर्देश

वहीं, झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के प्रबंधन के लिए तत्काल एक नियमित अधीक्षक की नियुक्ति करने का भी निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ मीडिया के एक वर्ग में हाल ही में प्रकाशित खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन खबरों में जेल परिसर में दो विचाराधीन कैदियों के "एक हॉल के अंदर नाचने" का जिक्र था, जिसका वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था।

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