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झारखंड में रहस्यमयी बीमारी से 10 काले हिरणों की मौत! डॉक्टर्स ने दिया ऐसा रिएक्शन

Edited By: Vinay Trivedi Published : Dec 07, 2025 06:28 pm IST, Updated : Dec 07, 2025 06:28 pm IST

जमशेदपुर के टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में सिर्फ 6 दिनों में 10 काले हिरणों की मौत ने हड़कंप मचा दिया, और इसने कभी चंचल रहने वाले इस पार्क को अब मेडिकल इमरजेंसी जोन में बदल दिया है।

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Image Source : PTI (सांकेतिक तस्वीर) जमशेदपुर में 10 काले हिरणों की हो गई मौत।

जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में मौजूद टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क से बुरी खबर आई है। यहां सिर्फ 6 दिनों में रहस्यमयी जीवाणु संक्रमण ने कथित रूप से 10 काले हिरणों की जिंदगी ले ली। जिस पार्क में कभी काले हिरणों की छलांग और सरपट दौड़ दिखती थी, वहां अब पशुओं के डॉक्टर्स और अधिकारियों की दौड़-भाग दिख रही है। पहले काले हिरण की मौत 1 दिसंबर को हुई, और फिर मौत का सिलसिला नहीं रुका। एक्सपर्ट्स को शक है कि यह रक्तस्रावी सेप्टिसीमिया यानी HS नामक इंफेक्शन है, जो काले हिरणों की जान ले रहा है। मौतों ने ना सिर्फ जमशेदपुर बल्कि रांची के बिरसा जैविक पार्क तक को अलर्ट कर दिया, जहां तुरंत एहतियाती स्टेप उठाए जा रहे हैं।

किस वजह से हुई काले हिरणों की मौत

टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क के उप निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने बताया, ‘‘पार्क में अब तक 10 काले हिरणों की जान जा चुकी है। हिरण की बॉडी को जांच और मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय ले जाया गया है। ऐसा लगता है कि यह जीवाणु इंफेक्शन के कारण हुआ है।’’

क्या पास्चरेलोसिस की चपेट में आए हिरण?

वहीं, रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय की पशु चिकित्सा पैथोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर प्रज्ञा लकड़ा ने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम हो चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘शक है कि यह रक्तस्रावी सेप्टिसीमिया है, जो पास्चरेला प्रजाति के बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। इसको पास्चरेलोसिस भी कहते हैं।’’

जूलॉजिकल पार्क में अब बचे कितने काले हिरण?

उन्होंने आगे कहा कि इस केस में आगे की जांच सोमवार को होगी। आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम बीमारी की पुष्टि कर पाएंगे। जान लें कि टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में पक्षियों समेत लगभग 370 जानवर हैं। वहां 18 काले हिरण हुआ करते थे। लेकिन अब केवल 8 काले हिरण ही बच पाए हैं।

पास्चरेला कैसे ले लेता है जान?

अख्तर ने बताया कि पहले काले हिरण की मौत 1 दिसंबर को हुई थी। वहीं, रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर एमके गुप्ता ने कहा कि पास्चरेला, जीवाणु से होने वाली बीमारी है जो बॉडी में बहुत तेजी से फैलता है और फेफड़ों पर असर डालता है। इससे अचानक मौत हो जाती है।

(इनपुट- भाषा)

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