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मांसपेशियों में इनएक्टीविटी रोकने वाली नई दवा आई सामने

 Reported By: IANS
 Published : Dec 11, 2017 11:42 pm IST,  Updated : Dec 11, 2017 11:42 pm IST

शोधकर्ताओं ने एक ऐसी दवा की खोज की है, जो मांसपेशियों में निष्क्रियता रोकने में असरदार साबित हो सकती है। एसआर8278 नामक दवा से फ्राइब्रोसिस (दाग-धब्बों) और डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) के तहत आने वाली मांसपेशियों की निष्क्रियता को रोका जा सकता है।

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हेल्थ डेस्क: शोधकर्ताओं ने एक ऐसी दवा की खोज की है, जो मांसपेशियों में निष्क्रियता रोकने में असरदार साबित हो सकती है। एसआर8278 नामक दवा से फ्राइब्रोसिस (दाग-धब्बों) और डचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) के तहत आने वाली मांसपेशियों की निष्क्रियता को रोका जा सकता है।

अमेरिका की सैंट लुईस यूनिवर्सिटी (एसएलयू) के शोधकर्ताओं ने बताया कि यह डीएमडी से पीड़ित लोगों के लिए नई दवा के निर्माण के लिए एक कारगर तरीका प्रदान कर सकती है।

यूनिवर्सिटी के थॉमस बरीस और कॉलिन फ्लैवनी का उद्देश्य इन रिसेप्टर्स को लक्षित करने वाले सिंथेटिक यौगिकों को विकसित करना था, ताकि शरीर के प्राकृतिक हार्मोन कैसे काम करते हैं, उसके अनुसार रोगों के उपचार के लिए दवाएं तैयार की जा सकें।

फ्लैवनी ने कहा, "शोध के दौरान हमने पाया है कि आरईवी-ईआरबी मांसपेशियों के ऊतक के विकास के प्रत्येक चरण में अद्वितीय भूमिका निभाते हैं।"

आरईवी-ईआरबी शरीर में नींद से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक प्रमुख प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है और हालिया निष्कर्षो से पता चला है कि यह मांसपेशियों के लिए भी सहायक है।

शोध दल ने पाया कि आरईवी-ईआरबी मांसपेशियों के विभेद का नियंत्रक है और इस रिसेप्टर को रोकने वाली एसआर 8278 नामक दवा तीव्र चोट के बाद भी मांसपेशियों को दोबारा बनने के लिए उत्तेजित करती है।

डीएमडी मांसपेशियों को खराब करने वाले विकार का एक घातक रूप है, जो एक्स गुणसूत्र वालों में जीन उत्परिवर्तन के कारण होता है।

उपचार के बावजूद डीएमडी पीड़ित लोगों का जीवनकाल लगभग 25 वर्ष तक ही रहता है। इस रोग से पीड़ित लड़कों को आमतौर पर 12 वर्ष की उम्र में व्हीलचेयर और सांस लेने के लिए मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत पड़ने लगती है।

कई रोगियों को हृदय या श्वसन तंत्र की खराबी का सामना करना पड़ता है।

चूहों पर किए गए शोध से पता चला किएसआर8278 दवा ने मांसपेशियों के क्रियान्वयन में वृद्धि की और मांसपेशी फाइब्रोसिस और मांसपेशियों में प्रोटीन गिरावट को भी कम किया।

यह शोध 'नेचर जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स' में प्रकाशित हुआ है।

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