दही चूड़ा मकर संक्रांति: 14 जनवरी को हर साल मकर संक्रांति मनाई जाती है। ये दिन देश के अलग-अलग हिस्सों अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। लेकिन, बात सिर्फ बिहार और पूर्वी यूपी के कुछ हिस्सों की करें तो इस दिन यहां दही चूड़ा खाने की परंपरा होती है। हालांकि, बिहार में दही-चूड़ा एक फेमस नाश्ता है लेकिन, मकर संक्रांति पर इसकी अलग ही बात होती है। दरअसल, इस दिन इसे बेहद पारंपरिक तरीके से बनाया और खाया जाता है। चूड़ा को जहां साफ करके दूध में भिगोकर रखा जाता है वहीं, दही को मिट्टी के बर्तन में बनाया जाता है। लेकिन, बहुत लोगों को मिट्टी के बर्तन में दही बनाने (curd in clay pot recipe) का तरीका मालूम नहीं होता है। तो, आइए जानते हैं इसका पारंपरिक तरीका।
मिट्टी के बर्तन में दही जमाने के लिए पहले तो दूध को खूब उबाल लें और इसे गाढ़ा होने तक पकाएं।
दूध ऐसे पकाएं की इस पर मलाई की मोटी परत आ जाए।
इसके बाद आपको मिट्टी का बर्तन लेना है और इसमें गर्म दूध को पलट लेना है।
दूध डालते समय ये ध्यान दें कि ये ऐसे डालें कि दूध का झाग बने।
फिर इसे ठंडा होकर गुनगुना होने दें।
सर्दियां हैं तो दूध को गुनगुना जल्दी हो सकता है इसलिए जल्दी-जल्दी चेक करें।
फिर इसमें जामन वाली दही मिलाएं। इस दौरान ख्याल रखें कि 1 केजी दूध की दही में 2 चम्मच दही का जामन भी काफी होगा।
सर्दी है तो 1 चम्मच और जामन डाल लें।
फिर इसे किसी चीज से मिला दें।
मिट्टी के बर्तन को ढक दें और किसी गर्म कपड़े में लपेट कर 6 से 8 घंटे के लिए रख दें।
दही जब जम जाए तो इसे फ्रिज में रख दें।
खाने से कुछ देर पहले निकाल लें ताकि ठंडक कम हो जाए।
इस तरह तैयार हो जाएगी आपकी गाढ़ी मलाईदार दही।

दही चूड़ा खाने से पहले चूड़ा को गर्म दूध में भिगोकर रख दें। फिर इसे थाली में परोसें और इस पर दही डाल लें। इसे चीनी के साथ नहीं, गुड़ के साथ खाएं। साथ में कद्दू की सब्जी, चटनी, आलू गोभी मटर की सूखी सब्जी और तिल की मिठाइयों के साथ खाएं।
दही चूड़ा खाने के बाद खाने के बाद आपको ठंड लगे तो इसके बाद थोड़ा सा गर्म पानी पी लें। तो, इस प्रकार से आप बिहार की स्टाइल में पारंपरिक रूप से मकर संक्रांति का त्योहार मना सकता है। ये हाई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर फूड न सिर्फ खाने में टेस्टी है बल्कि, सेहत के लिए भी ये फायदेमंद है।
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