1. Hindi News
  2. लाइफस्टाइल
  3. जीवन मंत्र
  4. जंगल में फैली आग की तरह व्यवहार करते हैं ऐसे स्वभाव वाले मनुष्य, फंस गए जाल में तो खुद को बचाना मुश्किल

जंगल में फैली आग की तरह व्यवहार करते हैं ऐसे स्वभाव वाले मनुष्य, फंस गए जाल में तो खुद को बचाना मुश्किल

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Aug 05, 2020 05:55 am IST,  Updated : Aug 05, 2020 05:55 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भरे ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार दुष्ट व्यक्ति किसी का भी बुरा कर सकते हैं इसी पर आधारित है।

"वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है, अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।" आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का मतलब है कि जंगल की आग हमेशा ठंडक देने वाली चंदन की लकड़ी को भी जला देती है ठीक इसी प्रकार से दुष्ट व्यक्ति जब बुरा करने पर उतर आता है तो वो किसी का भी बुरा कर सकता है। यहां पर आचार्य कहना चाहते हैं कि किसी कारणवश जब जंगल में आग लग जाती है तो वो अपनी चपेट में सभी लकड़ियों को ले लेता है। उस वक्त जंगल में फैली आग ये नहीं देखती कि उसे किसे अपनी चपेट में लेना है या नहीं। आग की प्रवृत्ति सब कुछ जलाकर खाक करने की होती है। वो अपनी चपेट में चंदन की लकड़ी को भी ले लेती है। 

चंदन की लकड़ी की तासीर ठंडी होती है। यानी कि बाकी लकड़ियों की तुलना में सबसे ठंडी चंदन की लकड़ी होती है। इसी वजह से मनुष्य की मृत्यु के बाद उसकी चिता के लिए चंदन की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि मरने के बाद उसका मन शांत रहे। लेकिन ये ठंडी प्रवृत्ति वाली लकड़ी भी जंगल में आग लगने पर खुद को बचा नहीं पाती और आग की चपेट में आकर भस्म हो जाती है। ठीक इसी प्रकार जब किसी व्यक्ति के मन में दुष्टता यानी कि छलकपट, राग द्वेष भरा होता है तो वो बुरा करने वक्त ये नहीं सोचता कि वो किसका बुरा करने जा रहा है। वो बस अपनी प्रवृत्ति के अनुरूप ही काम करता है। 

ऐसा करने पर उसकी चपेट में कई बार ऐसे व्यक्ति आ जाते हैं जो स्वभाव के भले होते हैं। लेकिन दुष्ट व्यक्ति उनके साथ ही बुरा ही व्यवहार करता है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि दुष्ट व्यक्ति अगर अपनी दुष्टता पर उतर आए तो वो किसी का भी अहित कर सकता है। 

अन्य खबरों के लिए करें क्लिक

ऐसे मनुष्य का साथ देने पर मजबूर हो जाता है भाग्य, कई बार तो किस्मत का लिखा भी बदल जाता है

मनुष्य को जीवन में कभी नहीं करना चाहिए ये एक काम, हुआ ऐसा तो डगमगा जाएगा जीवन का आधार

इस जीव की तरह व्यवहार करने वाले मनुष्य की नहीं करनी चाहिए इज्जत, पड़ गया पाला तो कांटों से भर जाएगी जिंदगी

इन तीन चीजों से हमेशा मनुष्य को बनाए रखनी चाहिए सौ गज की दूरी, एक की भी चपेट में आना कर देगा जिंदगी बर्बाद

इस एक चीज का मनुष्य में भय होना है बहुत जरूरी, वरना बन जाएगा दूसरों का जीवन दुखदायी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Religion से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें लाइफस्टाइल