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Navratri 2021: शारदीय नवरात्र के नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा, जानिए मुहूर्त, पूजा विधि,भोग और हवन विधि

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Oct 13, 2021 02:46 pm IST,  Updated : Oct 14, 2021 09:06 am IST

नवरात्र के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, भोग और हवन करने के बारे में सबुछ

maa siddhidatri shubh muhurat puja vidhi mantra- India TV Hindi
maa siddhidatri shubh muhurat puja vidhi mantra Image Source : INDIA TV

अश्विनी शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मां दुर्गा के नौवें रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। आपको बता दें कि नवमी तिथि शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। बीते 7 अक्टूबर को शुरू हुए नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र पूजा आज सम्पूर्ण हो जायेगी। 

नवरात्र के नवमी तिथि को महानवमी के नाम से जाना जाता है।नवरात्र के आखिरी दिन मां दुर्गा की नौवीं और अलौकिक शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा की जायेगी। नाम से ही स्पष्ट है सिद्धियों को देने वाली मां सिद्धिदात्री। कहा जाता है कि इनकी पूजा से व्यक्ति को हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।

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मार्केण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व, कुल आठ सिद्धियां हैं, जो कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं। देव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था और इन्हीं की कृपा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर कहलाएं, लिहाजा विशिष्ट सिद्धियों की प्राप्ति के लिये आज सिद्धिदात्री की पूजा अवश्य ही करनी चाहिए। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मुहूर्त और हवन की सही विधि।

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

यह देवी भगवान विष्णु की प्रियतमा लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान हैं और हाथों में कमल, शंख, गदा व सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं।

मां सिद्धिदात्री मंत्र

इस विशिष्ट मंत्र का 21 बार जरूर करें जाम

‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे | ऊँ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल
ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा

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सिद्धिदात्री पूजा विधि

नवमी के दिन इन्हीं की पूजा करना चाहिए। इस दिन कमल में बैठी देवी का ध्यान करना चाहिए। सुंगधित फूल अर्पित करें। मां को शहद अर्पित करें इसके साथ ही इस मंत्र का जाप करें- ऊं सिद्धिरात्री देव्यै नम:

इस मंत्र से करें देवी का पूजन

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैररमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।

मां दुर्गा को लगाएं इन चीजों का भोग

दुर्गार्चन पद्धति के अनुसार आज नवमी तिथि को कांसे के पात्र में नारियल पानी और तांबे के पात्र में शहद डालकर देवी मां को चढ़ाना चाहिए। कालिका पुराण में कुम्हाड़ा या कद्दू की बलि का विधान है।  गन्ने का रस भी देवी मां को चढ़ाया जा सकता है।

महानवमी को करें हवन

महानवमी को हवन करने का भी विधान है। इस दिन हवन आदि करने से घर की शुद्धि होती है और सबके जीवन में बरकत आती है, साथ ही घर का वास्तु अच्छा होता है और परिवार के सदस्यों में एक नयी ऊर्जा आती है। नवमी के दिन तिल, जौ, गुग्गुल आदि से हवन करना अच्छा होता है। सामग्री खरीदते समय ध्यान रहे कि हवन के लिए जौ के मुकाबले तिल दो गुना होना चाहिये और अन्य चिकनाई वाली और सुगंध वाली सामग्री जौ के बराबर मात्रा में होनी चाहिये ।

नवरात्र के आखिरी या फिर नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा करने के लिए नवान्न (नौ प्रकार के अन्न) का प्रसाद, नवरस युक्त भोजन तथा नौ प्रकार के फल-फूल आदि का अर्पण करना चाहिए। इस प्रकार नवरात्र का समापन करने से इस संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हवन करते समय इस दिशा की ओर करें मुख

देवी अष्टगंध के अलावा जौ, गुग्गुल, तिल इत्यादि से यज्ञ करने से उत्पन्न धुएं से न केवल व्यक्ति के दिमाग का माइंड एंड बॉडी कोऑर्डिनेशन ठीक होता है बल्कि घर के वास्तु में और घर की
कलेक्टिव बायोक्लॉक में बड़े ही पॉजिटिव बदलाव आते हैं। पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच बहने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों के बीच बसे हमारे घर में अग्नि कोण, हवन के लिए सबसे अच्छा होता है। घर के अग्नि कोण, यानि दक्षिण- पूर्व का कोना, यानि घर का वो हिस्सा जहां दक्षिण और पूर्व दिशायें मिलती हों, वहां बैठकर हवन करना सबसे अच्छा होता है। सही दिशा में किया गया हवन सही परिणाम देता है और उससे वास्तुदोष शांत होते हैं। हवन करने वाले व्यक्ति को भी दक्षिण-पूर्व में मुंह करके बैठना चाहिए। 

 

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