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भगवान शिव को प्रसन्न करने के 5 बेहद सरल उपाय, पूरी होगी हर मनोकामना

सावन का पवित्र महीना शिव आराधकों के लिए बहुत खास होता है। इस महीने आप इन 5 सरल उपायों से भोलेनाथ को प्रसन्न कर अपनी सारी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: July 09, 2020 7:18 IST
Lord Shiva - India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/MEMORIESMAHARASHTRA Lord Shiva -  भोलेनाथ

सावन का पवित्र महीना शिव आराधकों के लिए बहुत खास होता है। इसकी वजह भगवान भोलेनाथ का श्रावण मास के महीने का प्रिय होना है। शिव पुराण कथा के अनुसार शिव जी ऐसे भगवान हैं जो जल्द ही भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वर दे देते हैं। भोलेनाथ भक्तों का कल्याण करते हैं। भोले भंडारी का मन इतना कोमल होता है कि वो ये नहीं देखते कि उनकी भक्ति करना वाला कोई इंसान है या फिर जीव। वो सभी की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। अगर आप भी भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं तो ये पांच चीजें सावन के महीने में जरूर करें। इन चीजों से आप भोलेनाथ को आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं।

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  • भोलेनाथ को आप चावल के मात्र 4 दाने भी पूरी श्रद्धा से अर्पित करें तो वो प्रसन्न हो जाते हैं।
  • शिव जी को एक कलश शीतल जलधारा भी प्रसन्न कर देती है। यानी कि सावन के पावन महीने में अगर आप रोजाना शिवलिंग पर शीतल जल अर्पित करेंगे तो उससे भी शिव जी आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।
  • शिव जी को बेलपत्र अति प्रिय है। अगर आप रोजाना एक बेलपत्र भी उन पर चढ़ाएंगे तो भी वो जल्द प्रसन्न हो जाएंगे। 
  • बेलपत्र के अलावा भोलेनाथ को धतूरा और बेर भी अधिक प्रिय होता है। इसे भी शिवलिंग पर चढ़ाकर आप भोलेनाथ को खुश कर सकते हैं।
  • दूध, दही, चीनी, घी, शहद और गन्ने का रस श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। ऐसा करने से भी आपको मनचाहा वरदान मिलेगा। 

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 इन मंत्रों के उच्चारण से भी भोलेनाथ होंगे प्रसन्न

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं । विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं । चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं । मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ॥
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा । लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं । प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ॥
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं । प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि ॥

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय: ।।

 

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