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“औकात में रहो”, मध्यप्रदेश विधानसभा में कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर मचा बवाल, CM ने माफी मांगी, पर सब बेकार

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Feb 20, 2026 07:31 am IST,  Updated : Feb 20, 2026 07:31 am IST

कैलाश विजयवर्गीय के बयान से नाराज कांग्रेसी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि, बाद में उनकी तरफ से सीएम मोहन यादव ने माफी मांग ली, लेकिन इससे भी बात नहीं बनी और सदन अगले दिन तक स्थगित हो गया।

Congress MLA- India TV Hindi
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के साथ कांग्रेसी सांसद Image Source : PTI

मध्यप्रदेश विधानसभा में गुरुवार को कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर जमकर हंगामा हुआ। संसदीय कार्य मंत्री ने सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष को कहा 'औकात में रहो'। कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेस विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान माहौल शांत करने के लिए सीएम मोहन यादव ने अपने मंत्री की तरफ से माफी मांग ली, लेकिन हंगामा नहीं रुका। अंत में सदन की कार्यवाही अगले दिन तक रोक दी गई।

बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार को भागीरथपुरा मौत कांड और लाड़ली बहना योजना को लेकर घेरने की कोशिश की। इसके साथ ही अलग-अलग मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए जवाब मांगा। इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष को “औकात में रहो” कह दिया। इसके बाद विपक्षी सदस्य वेल में आ गए और करीब 40 मिनट तक जोरदार हंगामा चलता रहा। 

सीएम ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने पर विजयवर्गीय ने अपने व्यवहार पर असंतोष जताते हुए दुख व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इसके बाद हंगामा खत्म करने को कहा, लेकिन कांग्रेस विधायकों का गुस्सा कम नहीं हुआ। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद आगे आए और कहा ‘जाने-अनजाने में कोई शब्द निकले हों तो मैं माफी मांगता हूं। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी इस पर अफसोस जताया। इसके बाद कांग्रेस विधायक सदन से बाहर आ गए और सदन अगले दिन तक के लिए स्थगित हो गया।

सदन में क्या हुआ?

सिंघार ने सिंगरौली में सरकार और अदाणी के बीच हुए करार का मुद्दा उठाया और दावा किया कि सरकार बिजली खरीद के नाम पर 25 साल में अदाणी की कंपनी को एक से सवा लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी में है। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई और कहा कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए, जबकि विजयवर्गीय ने सिंघार पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। सिंघार ने कहा कि वह हर बात प्रमाण के साथ करते हैं और जरूरत पड़ने पर प्रमाण दे सकते हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और इसी दौरान विजयवर्गीय ने सिंघार के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। इसके बाद, विपक्षी कांग्रेस के सदस्य हंगामा करते हुए विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करने लगे। 

विधानसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?

हंगामा बढ़ता देख तोमर ने सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित कर दी। बाद में जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा की एक गौरवशाली परंपरा रही है लेकिन आज असहज स्थिति बन गई, जिसका कि उन्हें अफसोस है। तोमर ने कहा, ''गुस्सा आना नहीं चाहिए लेकिन आज आ गया, दोनों पक्षों की तरफ से। उसके कारण असहज स्थिति बनी। मुझे इसका रंज है इसके लिए पक्ष और प्रतिपक्ष जिम्मेदार हैं। संसदीय कार्य मंत्री बहुत अनुभवी हैं फिर भी आज सीमा कैसे टूट गई यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है।''

कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा- उमंग को प्यार करता हूं

विवाद बढ़ने पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "मैं उमंग को प्यार करता हूं... मैं अपने व्यवहार से दुखी हूं।'' वहीं सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह हमेशा अपनी हद में रहते हैं। उन्होंने कहा, ''मेरी औकात मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ जनता के सवालों को आपकी अहंकारी सत्ता के सामने मुखरता से रखने की है। मेरी इसी औकात ने आपको इतना बौना बना दिया कि आपके अंदर का असली चेहरा बाहर आ गया, मेरी इसी औकात ने आपको भगीरथपुरा पर बहस करने पर मजबूर किया।'' उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय द्वारा इस्तेमाल किए गए अपशब्द केवल उमंग सिंघार या किसी एक नेता प्रतिपक्ष के लिए नहीं थे, यह मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ जनता का अपमान है। उन्होंने कहा, ''जनता को कीड़े-मकोड़े समझने की मानसिकता रखने वाले मंत्री विजयवर्गीय ने असल में अपने अहंकार का परिचय दिया है। सत्ता का मद इतना चढ़ गया है कि जनप्रतिनिधि खुद को जनता से ऊपर समझने लगे हैं।''

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