मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कुत्ते का नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है। छिंदवाड़ा में कांग्रेसियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कुत्ते के गले में ज्ञापन लटका दिया तो दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने अफसरों की तुलना ही कुत्तों से कर दी। कांग्रेस के इस रवैये पर अब बीजेपी कह रही है। यह हताशा नहीं बौखलाहट है। दरअसल बीते दिनों छिंदवाड़ा में किसानों के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल छिंदवाड़ा कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचा।
कांग्रेस का आरोप है कि कलेक्टर ने ज्ञापन नहीं लिया। नाराज कांग्रेसियों ने ज्ञापन कुत्ते के गले में टांग दिया। तस्वीर वायरल हुई तो भड़के कांग्रेस के मीडिया प्रभारी ने कलेक्टर की तुलना कुत्ते से करते हुए कहा यह लोग कुत्ते से भी बुरे हैं।
उमंग सिंगार का भी विवादास्पद बयान
कुत्ते के इस मुद्दे पर अकेले मुकेश नायक का ही विवादास्पद बयान नहीं आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कलेक्टर को डरपोक बताते हुए कहा छिंदवाड़ा कलेक्टर भाजपा का गुलाम है, गुलाम है तो भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की चड्डी पहन ले।
भाजपा ने किया पलटवार
कांग्रेस नेताओं के बिगड़े बोल सामने आते ही भाजपा नेता भी सामने आए। बीजेपी नेताओं का कहना है कि बेजुबान कुत्तों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जानवरों पर अत्याचार हारी हुई मानसिकता है। ब्यूरोक्रेसी और कार्यपालिका पर आरोप लगा रहे हैं। यह दबाव की राजनीति मध्य प्रदेश में नहीं चलेगी। छिंदवाड़ा से शुरू हुआ कुत्ता विवाद अब पूरे प्रदेश की सियासत में गरम मसाला बन चुका है। कांग्रेस नेताओं की जुबान फिसली और बीजेपी इसे हताशा और बौखलाहट का नाम दे रही है।
दिल्ली में भी चर्चा में हैं कुत्ते
एमपी की सियासत के अलावा देश की राजधानी दिल्ली में भी कुत्ते चर्चा में हैं। यहां सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर के अंदर बंद करने का आदेश दिया था। हालांकि, बवाल के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब आक्रामक और रैबीज से संक्रमित कुत्तों को छोड़कर अन्य कुत्तों को वैक्सीन लगाने के बाद सड़कों पर छोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने और उनको खुले में खाना न खिलाने के आदेश भी जारी किए गए हैं।