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महिला सशक्तिकरण बिल पास न होने पर कांग्रेस पर बरसे सीएम मोहन यादव, कहा- 'जनता देगी जवाब'

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 18, 2026 01:57 pm IST,  Updated : Apr 18, 2026 01:57 pm IST

मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण बिल लोकसभा में पास नहीं होने दिया। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक को पास न होने देना गंभीर चिंता का विषय है।

Mohan Yadav- India TV Hindi
सीएम मोहन यादव Image Source : PTI

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संसद में महिला सशक्तिकरण से जुड़े विधेयक के पारित न होने पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता एक बार फिर उजागर हुई है। उन्होंने इसे अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विधेयक को पास न होने देना गंभीर चिंता का विषय है।

इस मुद्दे पर राजनीति उचित नहीं

मुख्यमंत्री यादव ने लिखा कि यह घटनाक्रम देश की माताओं और बहनों के अधिकारों व सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर इस तरह की राजनीति उचित नहीं है। उन्होंने लिखा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब अवश्य देगी।

कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता उजागर- मोहन यादव

सीएम मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, "कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता आज एक बार फिर उजागर हुई है। संसद में महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को पास न होने देना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह देश की माताओं-बहनों के अधिकारों और सम्मान के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जनता सब देख रही है और इसका जवाब समय पर अवश्य देगी।"

52 वोट से गिर गया महिला आरक्षण बिल

शुक्रवार को लोकसभा में महिला सशक्तिकरण बिल पर वोटिंग हुई। इस समय सदन में कुल 528 सदस्य मौजूद थे। इनमें से 298 ने पक्ष में और 230 ने इसके खिलाफ वोट किया। बिल को पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। इसके पक्ष में कुल 352 वोट चाहिए थे, लेकिन 298 वोट ही पड़े और यह बिल 54 वोट से गिर गया। सरकार एक साथ तीन बिल लेकर आई थी, जिसमें परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों के संविधान में बदलाव का बिल भी शामिल था, लेकिन पहला बिल गिरने के बाद सरकार ने बाकी दो पर वोटिंग नहीं कराई, क्योंकि तीनों बिल आपस में जुड़े थे। विपक्ष को आपत्ति सिर्फ दूसरे बिल से है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की बात कही गई थी। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि परिसीमन के लिए अलग पैमाना अपनाया जाना चाहिए। 2023 में महिलाओं को आरक्षण देने वाला सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और सरकार ने संसद में बहस के दौरान ही इसे नोटिफाई भी किया है।

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