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कफ सिरप त्रासदी: कर्ज की मार झेल रहे हैं मृत बच्चों के परिजन, इलाज के लिए गहने बेचे, जमीन तक गिरवी रखी

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Oct 07, 2025 09:03 am IST,  Updated : Oct 07, 2025 09:03 am IST

मृत बच्चों के परिजनों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी यह रही कि अपने जिगर के टुकड़ों का जीवन बचाने के लिए उन्होंने जो कुछ भी किया, वह सब व्यर्थ रहा। परासिया के रहने वाले यासीन खान ने चार साल के बेटे को बचाने के लिए आजीविका का एकमात्र साधन अपना ऑटो-रिक्शा तक बेच दिया।

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कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बोतल देखती एक बुजुर्ग महिला। Image Source : PTI

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मिलावटी कफ सिरप पीने से अपने बच्चों को खो चुके परिजनों ने पहले उन्हें बचाने के लिए संघर्ष किया, इसके लिए अपने बेशकीमती सामान बेच दिए, गहने तक गिरवी रख दिए और अब कर्ज के बोझ से उबरने के लिए जूझ रहे हैं। इन परिजनों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी यह रही कि अपने जिगर के टुकड़ों का जीवन बचाने के लिए उन्होंने जो कुछ भी किया, वह सब व्यर्थ रहा।

परासिया के यासीन खान ने सुनाई आपबीती

परासिया के रहने वाले यासीन खान ने अपने चार साल के बेटे उसेद के बेटे की हल्का बुखार और खांसी होने के बाद मौत हो गई। खान बड़ी उम्मीद के साथ उसेद का इलाज कराने एक स्थानीय डॉक्टर के पास गए थे और उन्होंने बच्चे को कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने का परामर्श दिया, जिसे बाद में जहरीला पाया गया। खतरे से अनजान, यासीन ने डॉक्टर की सलाह पर अपने बेटे को सिरप पिलाया। उसेद की हालत बिगड़ने पर उसे पहले छिंदवाड़ा के अस्पताल और फिर नागपुर भेज दिया गया। 13 सितंबर को उसकी मौत हो गई। कोल्ड्रिफ कफ सिरप को अब राज्य में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

बेटे को बचाने के लिए बेच दिया ऑटो-रिक्शा 

यासीन ने कहा, ''अपने बेटे को बचाने के लिए मैंने आजीविका का एकमात्र साधन अपना ऑटो-रिक्शा बेच दिया। फिर मेरी पत्नी ने इलाज का खर्च उठाने के लिए अपनी शादी के सभी गहने गिरवी रख दिए।" उसेद के परिजनों की पीड़ा तब और बढ़ गई जब इस संघर्ष के दौरान उनके छोटे से घर का एक हिस्सा ढह गया। जब यह हादसा हुआ तब परिवार नागपुर में अपने बच्चे का इलाज करवा रहा था। यह कहानी सिर्फ यासीन खान की नहीं है। उनके जैसे कुछ और भी परिजन हैं जो अपने बच्चों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने के बाद अब कर्ज और गरीबी से जूझ रहे हैं।

बच्चे के इलाज के लिए उधार लिए 5 लाख

परासिया गांव के ज्यादातर पीड़ित कम आय वाले परिवारों से हैं। दिहाड़ी मजदूर विकास यादव और उनकी पत्नी कुंती ने 27 सितंबर को अपने छोटे बेटे को खो दिया, क्योंकि उसने भी वही मिलावटी सिरप पिया था। आंखों में आंसू और रूंधी हुई आवाज में विकास यादव ने कहा, "हमने इलाज के लिए रिश्तेदारों और ग्रामीणों से लगभग 5 लाख रुपये उधार लिए। अब हम कर्ज में डूबे हुए हैं, इसे चुकाने का कोई साधन नहीं है।"

इन पीड़ित परिवारों के लिए कुछ राहत की बात ये है कि मध्य प्रदेश सरकार ने प्रत्येक शोक संतप्त परिवार के लिए 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है। हालांकि उनके दर्द और उनकी वित्तीय चिंताओं के सामने नाकाफी है।

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Image Source : PTIसीएम मोहन यादव ने मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात की।

CM मोहन यादव ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को छिंदवाड़ा में कुछ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें सरकारी सहायता देने के साथ साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "छिंदवाड़ा में हुई घटना के जवाब में हमने तमिलनाडु में संबंधित फैक्ट्री की दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। अन्य दो फैक्ट्रियों की दवाओं पर भी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार को पूरी घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है। हम संवेदनशीलता के साथ शासन करते हैं।" उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है।

छिंदवाड़ा के 14 बच्चों की किडनी खराब होने से मौत

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की। जहरीला कफ सिरप पीने से छिंदवाड़ा के अब तक 14 बच्चों की किडनी खराब होने से मौत हो गई। इन 14 मृतकों में से 11 परासिया उपमंडल से, दो छिंदवाड़ा शहर से और एक चौरई तहसील से हैं। अधिकारियों के अनुसार, नागपुर में आठ बच्चों का इलाज हो रहा है। इनमें से चार एक सरकारी अस्पताल में, एक एम्स में और तीन प्राइवेट अस्पतालों में हैं।

मौतों की जांच के लिए SIT का गठन

मध्य प्रदेश पुलिस ने मौतों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और तमिलनाडु में स्थित कोल्ड्रिफ कफ सिरप की निर्माता कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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