मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां 6 मासूमों की मौत हो गई। अंदेशा है कि कफ सिरफ के सेवन की वजह से इन बच्चों की मौत हुई है। इन सभी बच्चों की मौतें किडनी फेल होने के चलते हुई हैं, जिसका खुलासा बच्चों की बायोप्सी रिपोर्ट से हुआ है। यह रहस्यमय बीमारी छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र और उसके आस-पास के गांवों में फैली है। मामला सामने आते ही छिंदवाड़ा कलेक्टर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो कफ सिरप (Coldrif और Nextro-DS) पर बैन लगाया है।
कफ सिरप लाकर पिलाने लगे परिजन
सूत्रों के मुताबिक, 1 सितंबर के बाद परासिया, उमरेठ, जाटाछापर, बड़कुही और आस-पास के गांवों में बच्चों में सर्दी-खांसी और बुखार की शिकायतें तेजी से बढ़ीं। परिजन स्थानीय डॉक्टरों और मेडिकल दुकानों से कफ सिरप लाकर बच्चों को पिलाने लगे। लेकिन कुछ ही दिनों में बच्चों की हालत बिगड़ गई। पेशाब (यूरिन) आना बंद हो गया और कमजोरी बढ़ गई। स्थिति नाजुक होते देख उन्हें पहले परासिया और छिंदवाड़ा अस्पताल ले जाया गया, फिर गंभीर रूप से बीमार बच्चों को नागपुर रेफर करना पड़ा। बावजूद इसके अब तक 6 मासूमों की जान नहीं बचाई जा सकी।
"...तो उनकी किडनी फेल आती है"
मेडिकल कॉलेज छिंदवाड़ा, शिशु रोग विशेषज्ञ,दीपक पटेल ने मामले पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "बच्चों में एक अजीब तरह की बीमारी पाई जा रही है। उन्हें बुखार आता है और 5-7 दिन के भीतर यूरिन आना बंद हो जाता है। जब जांच करते हैं, तो उनकी किडनी फेल आती है। इस स्थिति में हम बच्चों को नागपुर रेफर कर रहे हैं, जहां उन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। अभी तक इस बीमारी से 6 बच्चों की मौत हो चुकी है और 7 से 8 बच्चों की डायलिसिस चल रही है। यह अभी भी रिसर्च का विषय है और निश्चित कारण हमें अब तक पता नहीं चल पाया है। अभी एक और बच्चा आया है जिसकी किडनी फेल पाई गई, हमने उसे भी नागपुर भेज दिया है।"
कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने कहा, "4 सितंबर को पहली मौत किडनी फेलियर होने से हुई, फिर परासिया में दूसरी मौत हुई और 6 तारीख को भी एक मौत हुई। 26 तारीख तक कुल 6 मौतें हो चुकी हैं। सभी मामलों में एक मुख्य समानता थी- एनोरिया यानी पेशाब का न बनना। ब्लड सैंपल और सीएसएफ (CSF) की जांच में जापानी या चांदीपुरा या कोई अन्य वायरस नहीं पाया गया। प्रशासन ने अब तक 538 सैंपल लिए हैं, जिनमें से 300 रिपोर्ट्स में किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट कराया गया, लेकिन इसमें भी कोई विशेष बीमारी नहीं पाई गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए SCDs और CDC की टीमें छिंदवाड़ा आई हैं।"
"फैसला किसी अंतिम निष्कर्ष के आधार पर नहीं"
छिंदवाड़ा में बच्चों की रहस्यमय मौतों के बाद Coldrif और Nextro-DS जैसे कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने कहा, "यह निर्णय डॉक्टरों की सलाह पर एक एहतियाती कदम के रूप में लिया गया है। प्रशासन ने यह फैसला इसलिए लिया, क्योंकि जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता, जबकि मौतों का स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आया है। डॉक्टरों की सलाह के आधार पर, क्योंकि कुछ लक्षण हैं... जिनकी डेथ हुई है उनमें इस तरीके के इस्तेमाल की बात आई है। डॉक्टरों ने सलाह दी थी कि एहतियाती उपाय के रूप में इन सिरप को रोका जाए और इनका इस्तेमाल न किया जाए। अभी उसकी सैंपल दिए गए हैं, जब तक फाइनल फाइंडिंग नहीं आती तब तक जान को खतरे में नहीं डाल सकते। इसलिए, यह फैसला किसी अंतिम निष्कर्ष के आधार पर नहीं, बल्कि प्रिकॉशनरी मेजर के तौर पर लिया गया है, ताकि आगे इस तरह की दुःखद स्थिति न उत्पन्न हो।"
छिंदवाड़ा कलेक्टर की गाइडलाइन
- बिना प्रिस्क्रिप्शन के बच्चों को दवा न दें।
- सर्दी-खांसी होने पर बच्चों को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।
- झोला छाप डॉक्टरों से इलाज बिल्कुल न कराएं।
- हर 6 घंटे में ध्यान रखें कि बच्चा यूरिन कर रहा है या नहीं, यदि नहीं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- उल्टी या सुस्ती की स्थिति में विलंब न करें और तत्काल चिकित्सक के पास जाएं।
- बच्चों को अधिक से अधिक पानी पिलाएं।
- यदि बुखार दो दिन से अधिक बना रहता है तो तुरंत इलाज कराएं।
"किसी डिजीज से मृत्यु होना नहीं पाया गया"
छिंदवाड़ा में बच्चों की रहस्यमय मौतों के मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) नरेश गोन्नाडे ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही जांच की प्रगति की जानकारी दी है। उन्होंने बताया, "अब तक लिए गए सैकड़ों सैंपलों में किसी विशिष्ट बीमारी (डिजीज) से मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुखार के मामलों में व्यापक जांच की गई है। हम लोगों ने बुखार के अंदर अब तक 538 सैंपल लिए हैं। इन सैंपलों में से 300 से ज़्यादा रिपोर्ट्स में किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट कराया गया है। लेकिन किसी डिजीज से मृत्यु होना नहीं पाया गया है। यह इंगित करता है कि मौत का कारण कोई ज्ञात संक्रामक बीमारी नहीं है।
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