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नर्मदापुरम में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए 'प्रोजेक्ट दामिनी' शुरू, लोगों को करेंगे जागरुक

 Written By: Shyamoo Pathak
 Published : Jul 03, 2026 10:51 pm IST,  Updated : Jul 03, 2026 10:51 pm IST

यूनिसेफ मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख विलियम हैनलॉन ने जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि आकाशीय बिजली से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है।

Narmadapuram- India TV Hindi
नर्मदापुरम Image Source : IMAGE SOURCE-X@RAJASINGH

नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में आकाशीय बिजली गिरने से मौतों में कमी लाने और समुदायों को इससे निपटने के लिए तैयार करने के उद्देश्य से शुक्रवार को 'प्रोजेक्ट दामिनी' की शुरुआत की गई। एक अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन, यूनिसेफ मध्यप्रदेश और आपदा प्रबंधन संस्थान (डीएमआई) के सहयोग से शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट दामिनी-नर्मदापुरम जिला लाइटनिंग सेफ्टी कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम' का उद्देश्य मानसून से पहले अंतिम व्यक्ति तक जागरूकता पहुंचाना, जीवनरक्षक व्यवहार को बढ़ावा देना और समुदायों की तैयारियों को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत के अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारी, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता तथा स्कूली छात्र-छात्राएं मौजूद रहे तथा इस दौरान लोगों के लिए आकाशीय बिजली जैसी घातक मौसम संबंधी आपदा से सुरक्षित रखने के संकल्प को दोहराया गया। 

वचाव को लेकर लोगों को किया जाएगा जागरुक

अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन ने 'इलेक्ट्रा' नामक एक बाल-अनुकूल शुभंकर (मैस्कॉट) का भी अनावरण किया, जिसे बच्चों और समुदायों को आकाशीय बिजली से बचाव के सरल एवं जीवनरक्षक उपायों के प्रति जागरूक करने के लिए तैयार किया गया है। यूनिसेफ मध्यप्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख विलियम हैनलॉन ने जिला प्रशासन को बधाई देते हुए कहा कि आकाशीय बिजली से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर चेतावनी, सामुदायिक जागरूकता और स्थानीय नेतृत्व के समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हर चेतावनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक परिवार सुरक्षित रहने के उपायों से अवगत हो। नर्मदापुरम के जिलाधिकारी सोमेश मिश्रा ने कहा कि आपदा आने से पहले तैयारी शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'प्रोजेक्ट दामिनी' के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत किया जा रहा है, 'लाइटनिंग मित्रों' को प्रशिक्षित किया जा रहा है तथा समय पर चेतावनी और जीवनरक्षक जानकारी जिले के प्रत्येक गांव तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। 

विशेषज्ञों ने भी रखी अपनी राय

यूनिसेफ मध्यप्रदेश के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने 'दामिनी लाइटनिंग अलर्ट ऐप' के व्यापक उपयोग और सामुदायिक जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी तभी जीवन बचा सकती है, जब लोग उसके बारे में जानें और चेतावनी मिलने पर उचित कार्रवाई करें। डीएमआई, भोपाल के तकनीकी विशेषज्ञ अभिषेक मिश्रा ने बताया कि परियोजना के तहत 'दामिनी ऐप' के प्रचार-प्रसार, 'लाइटनिंग मित्रों' के प्रशिक्षण, स्कूल आधारित जागरूकता गतिविधियों तथा गांव स्तर पर तैयारियों को बढ़ावा दिया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि 'प्रोजेक्ट दामिनी' के तहत किसानों, स्कूली बच्चों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और ग्रामीण समुदायों के बीच पारंपरिक तथा डिजिटल माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। 

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