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नवजात बच्ची ICU में थी, माता-पिता बंधुआ मजदूरी कर रहे थे, 4 दिन अस्पताल में पड़ा रहा शव फिर पहुंची पुलिस

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 07, 2026 11:38 pm IST,  Updated : May 07, 2026 11:38 pm IST

बच्ची 40 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही, लेकिन उसके माता-पिता एक-दो बार ही उससे मिलने आ सके। मौत के बाद उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया था। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : FREEPIK

सीहोर जिला अस्पताल में एक नवजात बच्ची का शव चार दिनों तक पड़ा रहा। इसके बाद पुलिस एक्टिव हुई और बच्ची के माता-पिता को ढूंढकर लाई। सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव के अनुसार, अंजनी और रवि के यहां 24 मार्च को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। प्रसव के दौरान एक बच्चे की मृत्यु हो गई थी। दूसरी बच्ची का जन्म के समय वजन मात्र 1.4 किलोग्राम था, जो कि सामान्य से बहुत कम था। बच्ची को बचाने के लिए उसे 40 दिनों तक गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया और हर संभव इलाज दिया गया। अंततः 3 मई  की शाम को बच्ची ने दम तोड़ दिया। 

डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के इलाज के दौरान भी उसके पिता केवल एक या दो बार ही उससे मिलने आए। बच्ची की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की, फोन किए, लेकिन उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया। सिविल सर्जन ने कहा कि हमने पुलिस चौकी और कोतवाली को भी सूचित किया है। परिजनों के काम करने के स्थान पर भी संदेश भिजवाया गया, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई शव लेने नहीं आया। 

70 हजार के कर्ज के बदले पिता को बनाया बंधक 

​बच्ची के पिता रवि ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह एक स्थानीय किसान, मनोज जाट के पास काम करता था। रवि के मुताबिक, उस पर किसान का लगभग 70,000 रुपये का कर्ज बकाया था। इसी कर्ज की वसूली के लिए किसान ने रवि और उसके एक अन्य साथी को जबरन बंधक बना लिया था। रवि ने बताया कि उसकी बच्ची अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन कर्ज न चुका पाने के कारण किसान ने उसे बच्ची के पास जाने की अनुमति नहीं दी। रवि के अनुसार ​उसे और उसके साथी को 'नजरबंद' कर दिया गया था। किसान का कहना था कि जब तक पैसे का हिसाब नहीं होगा, तब तक उसे वहां से जाने नहीं दिया जाएगा।

आरोपी किसान पर होगी सख्त कार्रवाई

रवि ने बताया कि वह चाहकर भी पुलिस के पास नहीं जा सका, क्योंकि उसे आने ही नहीं दिया जा रहा था। जब पुलिस गांव पहुंची, तब जाकर उसे वहां से निकाला गया। पिता का आरोप है कि यदि उसे समय पर अस्पताल जाने दिया जाता, तो शायद उसकी बच्ची की जान बच सकती थी। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

देवास में थे माता-पिता

​बताया गया है कि पुलिस अस्पताल से मिली सूचना के बाद मृतक बच्ची के माता-पिता को खोजने आष्टा के ग्राम हकीमाबाद गई थी। लेकिन वहां से पता चला की बच्ची के माता-पिता अंजलि और रवि, देवास जिले के सोनकच्छ के पास ग्राम जालेरिया में है, जहां से पुलिस उनको लेकर आज सीहोर आई और बच्ची की डेड बॉडी उनके सुपुर्द की गई। मामला देवास से जुड़ा होने के कारण वहां की पुलिस को भी सूचना दी है।

(सीहोर से राहुल मालवीय की रिपोर्ट)

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