मुंबई: बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले में मृतक आरोपी के माता-पिता ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट से कहा कि वे अपने बेटे की हिरासत में मौत की एसआईटी जांच की मांग वाली अपनी याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। माता-पिता ने अदालत को यह भी बताया कि उन पर मामला वापस लेने का कोई दबाव नहीं है और वे व्यक्तिगत कठिनाई के कारण मामले के लिए अब इधर-उधर भागना नहीं चाहते हैं और उन्होंने मामले को खत्म करने मांग की है।
कोर्ट ने कहा- केस ऐसे बंद नहीं कर सकते
अदालत ने कहा कि वह मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार, 7 फरवरी को करेगी। कोर्ट कहा कि वह याचिका को इस तरह बंद नहीं कर सकती क्योंकि मामले में बहुत कुछ हो चुका है और सवाल किया कि अभी तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वह कानून के अनुसार हिरासत में मौत की स्वतंत्र जांच जारी रखेगी।
अक्षय शिंदे के परिजनों ने दायर की थी याचिका
यह याचिका अक्षय के पिता अन्ना शिंदे ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उनके बेटे को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया। दंपति ने बृहस्पतिवार को कार्यवाही के अंत में पीठ से कहा कि वे मामले को आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं और चाहते हैं कि इसे बंद कर दिया जाए। दंपति ने पीठ से कहा कि उन पर किसी का कोई दबाव नहीं है और उन्होंने खुद ही बयान दिया है।
अक्षय शिंदे का हुआ था एनकाउंटर
बता दे कि ठाणे जिले के बदलापुर के एक स्कूल में दो नाबालिग लड़कियों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किए गए 23 वर्षीय अक्षय शिंदे की पिछले साल 23 सितंबर को पुलिस वाहन में ले जाते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि एक अधिकारी का सर्विस हथियार छीनने और तीन राउंड फायरिंग करने के बाद जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया, जिससे एक अधिकारी घायल हो गया।
मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट में पांच पुलिसकर्मी दोषी
पिछले वर्ष ठाणे जिले के बदलापुर शहर में एक स्कूल के शौचालय के अंदर दो बच्चियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में अक्षय शिंदे (24) को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी उस स्कूल में सहायक था। पूछताछ के लिए नवी मुंबई की तलोजा जेल से ठाणे ले जाते समय पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में अक्षय मारा गया था। पिछले महीने अदालत में पेश की गई मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट में पांच पुलिसकर्मियों - वरिष्ठ निरीक्षक संजय शिंदे (ठाणे अपराध शाखा), सहायक निरीक्षक नीलेश मोरे, हेड कांस्टेबल अभिजीत मोरे, हरीश तावड़े और पुलिस वैन चालक सतीश खताल को शिंदे की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में मजिस्ट्रेट अशोक शेंगड़े ने कहा कि साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों के कारण, “पुलिस कर्मियों द्वारा निजी या आत्मरक्षा के अधिकार का उठाया गया दावा संदेह के घेरे में आता है।
इनपुट- पीटीआई