मुंबईः महाराष्ट्र के गृह विभाग की तरफ से एक बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके मुताबिक अब महाराष्ट्र पुलिस में हेड कांस्टेबल रैंक का अधिकारी भी गुनाह की जांच कर पाएगा। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इसको लेकर राजपत्र जारी किया गया है। जारी किए गए राजपत्र में कुछ नियम भी बनाए गए हैं। इसके अनुसार, हेड कांस्टेबल को सात साल से अधिक का अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा दी जाने वाली ट्रेनिंग और उसके ऊपर कोई भी इंक्वारी या जांच शुरू नहीं होनी चाहिए।
पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी करता था क्राइम की जांच
इसके साथ ही पुलिस हेड कांस्टेबल को स्नातक होना चाहिए। इसके साथ ही 7 वर्ष की सेवा पूरी करना और आपराधिक जांच प्रशिक्षण स्कूल, नासिक में 6 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण पूरा करना और परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा। बता दें इसके पहले केवल पुलिस उप निरीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ही किसी भी गुनाह की जांच कर सकता था।
अधिकारियों पर दबाव कम होगा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में भले ही पुलिसकर्मियों की संख्या अपर्याप्त है, लेकिन अधिकारियों की संख्या पर्याप्त है। इसलिए अपराधों की जांच का कार्य पुलिस उप-निरीक्षक से ऊपर के पद के अधिकारियों को सौंपा जाता है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त जनशक्ति के साथ-साथ अधिकारियों की संख्या भी कम है। यह देखा गया है कि एक ही अधिकारी द्वारा कई अपराधों की जांच करने से अधिकारियों पर तनाव बढ़ रहा है और अपराध सुलझाने की दर भी कम है। अब जबकि उच्च शिक्षित युवाओं को पुलिस बल में भर्ती किया गया है। गृह विभाग ने उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें छोटे-मोटे अपराधों की जांच का जिम्मा सौंपने का निर्णय लिया है। इससे कुछ हद तक अधिकारियों पर तनाव कम होगा और अपराध सुलझाने की दर भी बढ़ेगी। बताया जा रहा है कि गृह विभाग ने इसी के तहत यह निर्णय लिया है।