मुंबई। उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य में शराब बिक्री के लिए ई-टोकन सिस्टम की शुरुआत पायलेट आधार पर की है। इस परियोजना की शुरुआत यहां रविवार से की गई। संतोषजनक परिणाम आने पर इस योजना को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। सरकार ने यह कदम शराब की दुकानों के बाहर लगने वाली भीड़ को देखते हुए उठाया है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है।
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भीड़ की वजह से मुंबई महानगर पालिका ने 1169 शराब दुकानों को कुछ समय के लिए बंद रखने का निर्णय लिया है। ओसमानाबाद और लातूर में भी भीड़ की वजह से शराब दुकानों को खोलने के लिए दी गई मंजूरी को वापस लेना पड़ा है।
राज्य आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने पुणे मेट्रोपोलिटन एरिया में ई-टोकन सिस्टम की पायलेट आधार पर शुरुआत की है। इसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने शराब दुकानों के बाहर भीड़ को कम करने के लिए ई-टोकन सिस्टम की शुरुआत की है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलीवरी शुरू की है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि इस नई प्रणाली के तहत राज्य के आबकारी विभाग की वेबसाइट पर लोग खुद को पंजीकृत करने के बाद टोकन हासिल करेंगे और फिर शराब खरीदने दुकान पर जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास टोकन होगा, दुकान पर सिर्फ वही लोग जाएंगे। इससे शराब की दुकानों के बाहर लंबी कतार को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना एक निश्चित संख्या में ही टोकन जारी करने की है। इस व्यवस्था की शुरुआत पुणे में होगी और अगर यह यहां सफल होता है तो इसे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया जाएगा।
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने शराब की होम डिलीवरी पर भी विचार करना शुरू किया है ताकि भीड़ को कम किया जा सके और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित हो सके। महाराष्ट्र में आबकारी कर राजस्व प्राप्ति का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। अधिकारी ने बताया कि शराब की ऑनलाइन बिक्री और होम डिलीवरी योजना पर तभी काम शुरू होगा, जब लॉकडाउन की वजह से राज्य के राजस्व में बहुत अधिक गिरावट आएगी।
सरकार ने अनुमान लगाया है कि लॉकडाउन की वजह से उसे 50,000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो चुका है। अर्थव्यवस्था को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञों की एक समिति का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 में राज्य के राजस्व में 40 प्रतिशत की गिरावट आएगी। सरकार के बजट लक्ष्य के विपरीत राजस्व में 1.40 लाख करोड़ रुपए की कमी रहेगी।