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महाराष्ट्र में 68 लाख 'लाड़की बहिन' खाते बंद, अब नहीं मिलेगा योजना का लाभ, सामने आई वजह

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Apr 02, 2026 09:22 am IST,  Updated : Apr 02, 2026 09:25 am IST

महाराष्ट्र में 'लाड़की बहिन योजना' के लाभार्थियों के लिए बड़ी खबर है। सत्यापन के बाद 68 लाख खाते बंद कर दिए गए हैं। अपात्र लोगों को मिल चुकी राशि को वापस नहीं लिया जाएगा।

एक कार्यक्रम में आई  'लाड़की बहिन योजना' की लाभार्थी महिलाएं- India TV Hindi
एक कार्यक्रम में आई 'लाड़की बहिन योजना' की लाभार्थी महिलाएं। फाइल फोटो Image Source : PTI

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की मुख्य योजना 'लाड़की बहिन योजना' के तहत लगभग 68 लाख खाते बंद कर दिए गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लाभार्थियों ने तय समय सीमा से पहले अनिवार्य e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसके चलते सक्रिय खातों की संख्या घटकर लगभग 1.75 करोड़ रह गई है।

e-KYC के लिए समय सीमा 30 अप्रैल तक बढ़ी

e-KYC पूरी करने की समय सीमा 31 मार्च को खत्म हो गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है। नवंबर 2025 से अब तक e-KYC प्रक्रिया की समय सीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस समय सीमा विस्तार के बाद बंद खातों की संख्या में बदलाव आ सकता है। बुधवार को एक अधिकारी ने बताया, "कुल 2.43 करोड़ खातों में से लगभग 68 लाख खाते इसलिए बंद कर दिए गए हैं, क्योंकि लाभार्थियों ने तय समय के भीतर अनिवार्य e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं की। 

इसलिए हो रहा सत्यापन

राज्य सरकार ने यह सत्यापन अभियान तब चलाया, जब उसे शिकायतें मिलीं कि इस योजना के तहत अपात्र लोगों जिनमें पुरुष सदस्य और सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे को भी लाभ मिल रहा था। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

हर महीने पात्र महिलाओं को मिलते हैं 1500 रुपये

राज्य सरकार हर महीने लाभार्थियों को लगभग 3,700 करोड़ रुपये वितरित करती है, जिसमें प्रत्येक पात्र महिला को 1,500 रुपये मिलते हैं। सक्रिय खातों की संख्या कम होने के कारण, इस खर्च में भी बदलाव आने की उम्मीद है। 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 26,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-26 में यह राशि 36,000 करोड़ रुपये थी। 'लाड़की बहिन योजना' को 2024 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले 'महायुति' सरकार द्वारा शुरू किया गया था। 

अपात्र लोगों को मिल चुकी राशि वापस नहीं लेगी सरकार

सत्यापन प्रक्रिया के दौरान, पहले 24 लाख से अधिक लाभार्थियों को 'सरकारी कर्मचारी' के रूप में चिह्नित कर दिया गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मराठी भाषा में पूछे गए एक प्रश्न के कारण लाभार्थियों ने गलत जवाब दे दिए थे। गहन जांच-पड़ताल के बाद, इनमें से लगभग 20 लाख खाते पात्र पाए गए, जबकि शेष मामलों का सत्यापन अभी भी जारी है। सरकार ने यह फैसला किया है कि जिन लाभार्थियों को अपात्र पाया गया है, उनसे दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया है कि इस योजना को बंद नहीं किया जाएगा।

रिपोर्ट- पीटीआई

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