1. Hindi News
  2. महाराष्ट्र
  3. मुकेश अंबानी ने पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में की डॉ. रघुनाथ माशेलकर की तारीफ, कहा- उनकी जीवन यात्रा आधुनिक भारत का है प्रतिबिंब

मुकेश अंबानी ने पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में की डॉ. रघुनाथ माशेलकर की तारीफ, कहा- उनकी जीवन यात्रा आधुनिक भारत का है प्रतिबिंब

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Dec 21, 2025 05:34 pm IST,  Updated : Dec 21, 2025 05:38 pm IST

डॉ. माशेलकर की रिकॉर्ड 54 मानद पीएचडी के सम्मान में आयोजित समारोह में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने उनके संघर्ष, विनम्रता और योगदान को याद किया।

Mukesh Ambani Address- India TV Hindi
डॉ. माशेलकर के सम्मान में आयोजित समारोह और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुकेश अंबानी का संबोधन। Image Source : INDIA TV

डॉ. माशेलकर की रिकॉर्ड 54 पीएचडी के उपलक्ष्य में पुस्तक विमोचन के मौके पर उनके सम्मान में आयोजित समारोह में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने संबोधन किया। उन्होंने कहा कि आज वास्तव में मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से एक बहुत ही विशेष शाम है। सबसे पहले प्रोफेसर एम. एम. शर्मा के बारे में बात करूंगा, जिनका मुझ पर उस समय से सबसे गहरा प्रभाव रहा है, जब मैं 20 साल का था। यह 44 साल पहले की बात है। और मेरे निजी जीवन में डॉ. माशेलकर से मैं 90 के दशक में मिला। इन दोनों महान व्यक्तित्वों ने मेरी सोच को आकार दिया है और रिलायंस ने जो कुछ भी हासिल किया है, उसके कई परिणामों के लिए वे जिम्मेदार हैं।

54 मानद डॉक्टरेट के लिए की तारीफ

मुकेश अंबानी ने कहा कि 54 मानद डॉक्टरेट, अधिकांश लोग अपने पूरे जीवन में एक डिग्री पाने के लिए संघर्ष करते हैं। डॉ. माशेलकर ने इन्हें ऐसे अर्जित किया है, जैसे कुछ लोग फ्रीक्वेंट फ्लायर माइल्स इकट्ठा करते हैं! जब भी मैंने उन्हें उनकी मानद पीएचडी या उनसे भी अधिक पुरस्कारों के लिए बधाई दी, तो वे कहते थे, “अरे मुकेश, असली काम तो अभी शुरू होना है।” यही है- जिस तरह हमने पिछले दो-तीन दशकों में उन्हें देखा है। और उनके साथ काम किया है। डॉ. माशेलकर उस कहावत वाले फल लदे समृद्ध वृक्ष की तरह हैं, जो हमेशा झुका रहता है। वे विनम्रता की प्रतिमूर्ति हैं।

डॉ. माशेलकर के संघर्ष का जिक्र

उन्होंने आगे कहा कि डॉ. माशेलकर की जीवन-यात्रा में मुझे आधुनिक भारत की यात्रा दिखाई देती है। मुंबई की स्ट्रीटलाइट्स के नीचे पढ़ाई करने वाला एक युवा बालक, आगे चलकर पूरे राष्ट्र की वैज्ञानिक कल्पना को आलोकित करता है। उनके बचपन में उनके पास केवल उनकी मां, श्रीमती अंजनी जी का प्रेम, और उनका अपना दृढ़ संकल्प व अथक परिश्रम था। उन्होंने अभाव से उठकर वैश्विक सम्मान तक की यात्रा की।

भारतीय समाज और हिमखंड की तुलना करके समझाया

अपनी पुस्तकों और भाषणों में उन्होंने भारतीय समाज की तुलना अक्सर एक हिमखंड से की है, जहां अधिकांश लोग दृश्य सतह के नीचे रहते हैं। वे कहते हैं, “वैज्ञानिकों, उद्यमियों और नवप्रवर्तकों के रूप में हमारी चुनौती है कि हम इस हिमखंड को सतह के ऊपर उठाएं, ताकि हर व्यक्ति को वह जीवन-स्तर मिल सके जिसका वह हकदार है।”

और यही बात प्रोफेसर शर्मा, डॉ. माशेलकर और मेरे पिता- तीनों में समान है। मेरे पिता धीरूभाई ने रिलायंस की स्थापना एक ही उद्देश्य से की, ‘हमें भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता का विकास करना है’। भारत और भारतीयों को आगे बढ़ना है और यही रिलायंस का उद्देश्य था। और यही हम आज भारत में होते हुए देख रहे हैं। नया भारत युवा सपने देखने वालों से भरा है। लाखों सपने साकार हो रहे हैं।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। महाराष्ट्र से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।