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शिरपूर जैन तीर्थ में फिर मारपीट, एक युवक को मंदिर से ले जाकर लाठियों से पीटा, CCTV में कैद हुई घटना

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Dec 28, 2025 09:53 am IST,  Updated : Dec 28, 2025 09:53 am IST

हमले में 5-6 लोग शामिल थे। इन लोगों ने मंदिर से एक युवक को बाहर निकाला और उसके साथ जमकर मारपीट की। कई लोग लात-घूसों से उसे पीट रहे थे। वहीं, एक व्यक्ति लगातार डंडे बरसा रहा था।

Shirpur temple- India TV Hindi
शिरपूर में मारपीट Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र के वाशिम में एक बार फिर शिरपूर जैन तीर्थ में मारपीट की घटना सामने आई है। यहां 5-6 लोगों ने एक युवक को मंदिर से बाहर ले जाकर मारपीट की। पूर घटना सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसमें आरोपी बेरहमी से पीड़ित को लात-घूंसे और डंडे से पीटते नजर आ रहे हैं। इस घटना के विरोध में पुलिस थाने पर विरोध मोर्च किया जाएगा। वाशिम जिले का शिरपूर जैन क्षेत्र जैन धर्म की काशी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां एक बार फिर दिगंबर और श्वेतांबर जैन समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।

26 दिसंबर को दिगंबर और श्वेतांबर पंथों के श्रद्धालुओं के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद दिगंबर जैन समाज के विजय जैन ने शिरपूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत को लेकर नाराज श्वेतांबर पंथ से जुड़े कुछ लोगों ने शनिवार दोपहर विजय जैन को मंदिर परिसर से जबरन उठाकर ले जाते हुए लाठियों से बेरहमी से पीटा। बताया जा रहा है कि इस हमले में 5 से 6 लोग शामिल थे, जिसमें विजय जैन के पैर में गंभीर चोट आई है।

घटना के विरोध में मार्च

मारपीट की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है और एक श्रद्धालु ने इसे मोबाइल में भी रिकॉर्ड किया है। इस मामले की जानकारी दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने जिला पुलिस अधीक्षक को दी है। घटना के विरोध में दिगंबर जैन समाज की ओर से रविवार दोपहर दो बजे शिरपूर पुलिस थाने के खिलाफ विरोध मार्च निकालने की घोषणा की गई है। 

क्या है विवाद की वजह?

शिरपुर जैन तीर्थ महाराष्ट्र के वाशिम जिले में स्थित अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में दिगंबर और श्वेतांबर जैन संप्रदायों के बीच विवाद का मुख्य कारण मंदिर का प्रबंधन, पूजा-विधि और प्रतिमा पर अधिकार है। यह विवाद 100 साल से भी पुराना है और कई बार हिंसक झड़प हो चुकी हैं। विवाद मूल रूप से अंतरिक्ष पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा की पूजा-शैली और मंदिर के नियंत्रण को लेकर है। दोनों संप्रदायों में मूर्ति पूजा के नियम अलग-अलग हैं। श्वेतांबर संप्रदाय की मान्यता के अनुसार तीर्थंकर की प्रतिमा पर कटिसूत्र (कमरबंद), कंधोरा, लेपन, चंदन, तिलक, मुकुट, आभूषण आदि लगाया जाता है। वहीं, दिगंबर संप्रदाय  केवल नग्न रूप की उपासना करता है। श्वेतांबर खुली आंखें, तिलक, मुकुट, वस्त्र आदि के साथ पूजा करते हैं। वहीं, दिगंबर बिना किसी सजावट के पूजा करते हैं। मार्च 2023 और जून 2024 में भी विवाद हो चुका है।

(वाशिम से इमरान की रिपोर्ट)

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