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अरुणाचल में बाढ़ और भूस्खलन से गंभीर हुए हालात, लगातार बारिश ने कई इलाकों में मचाया कहर

 Published : Jun 05, 2025 05:40 pm IST,  Updated : Jun 05, 2025 05:40 pm IST

अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश से बाढ़ और भूस्खलन ने भयंकर तबाही मचाई है। 33 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, 12 लोगों की मौत हुई है और 2 लापता हैं। सूबे का चांगलांग जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है।

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अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही के बीच अपनी ड्यूटी निभाते ITBP के जवान। Image Source : X.COM/ITBP_OFFICIAL

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने हालात को गंभीर कर दिया है। बाढ़ और भूस्खलन की वजह से 24 जिलों में 33 हजार से ज्यादा लोग मुश्किल में हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस साल मॉनसून की बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है और दो लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए राहत टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। बता दें कि बाढ़ का प्रकोप अरुणाचल प्रदेश के अलावा असम, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में भी है।

बाढ़ की वजह से हुई है भारी तबाही

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन ने 214 गांवों को अपनी चपेट में लिया है। नदियां और उनकी सहायक नदियां उफान पर हैं, हालांकि अभी पानी का स्तर सामान्य से नीचे है। इस आपदा में 481 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से तबाह हो गए हैं और 432 पशु मारे जा चुके हैं।

सूबे का कौन सा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित?

चांगलांग जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां 6 गांव पानी में डूब गए और 2,231 लोग बेघर हो गए। मियाओ उपविभाग में फसलों और पशुओं को भारी नुकसान हुआ है। नोआ-देहिंग नदी के किनारे बने मशहूर पर्यटन स्थल ज़ुप्रा और रीवर कैफे भी बाढ़ के पानी में डूब गए। खारसांग के बालिनोंग में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के छात्रावास, कर्मचारी आवास और पानी की टंकियों को भी नुकसान पहुंचा है।

ईटानगर में पानी का जबरदस्त संकट

राजधानी ईटानगर में भूस्खलन की वजह से पोमा जलापूर्ति परियोजना की पाइपलाइनें टूट गईं, जिससे पेयजल की भारी किल्लत हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि पानी की आपूर्ति बहाल करने में करीब 10 दिन लग सकते हैं। तब तक लोगों को पानी के टैंकरों के जरिए पानी मुहैया कराया जा रहा है।

अब तक जानमाल का कितना नुकसान?

रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में 12 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 7 पूर्वी कामेंग में, 2 निचले सुबानसिरी में और लोंगडिंग, लोहित व अंजॉ जिलों में एक-एक मौत दर्ज की गई। 9 लोग भूस्खलन, एक बाढ़, एक दीवार गिरने और एक मई में लोंगडिंग में पेड़ गिरने की वजह से मरे। इसके अलावा, चार लोग घायल भी हुए हैं।

प्रशासन कैसे कर रहा लोगों की मदद?

प्रशासन ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए तीन राहत शिविर शुरू किए हैं, जहां 239 बेघर लोग शरण लिए हुए हैं। अब तक 2,292 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है, जिनमें से ज्यादातर चांगलांग जिले के हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस और स्वयंसेवक मिलकर राहत कार्य में जुटे हैं। (भाषा)

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