संसद में आज वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश हुआ। सर्वे के मुताबिक अगले साल भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होने की पूरी उम्मीद है। हालांकि सर्वे में आगाह किया गया है कि सरकारी खर्चों में कटौती ग्रोथ की उम्मीदों को तोड़ सकते हैं। सर्वे में सलाह दी गई है कि सरकार आम लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ाने पर फोकस करे।
सर्वे के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था 6 से 6.5 फीसदी की दर से बढ़त दर्ज कर सकती है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 5 फीसदी रखा गया है। सर्वे के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बनी रहेंगी, ऐसे में विकास दर की रफ्तार वापस हासिल करने के लिए सरकारी घाटे को लेकर नरम रुख अपनाने की ज़रुरत है। सर्वे में मांग बढ़ाने के लिए जरुरत के मुताबिक वित्तीय कदम उठाने की भी सलाह दी गई है। सर्वे के मुताबिक जीडीपी के मुकाबले टैक्स आय के कम अनुपात की वजह से इंफ्रा पर सरकार के खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ा है। हालांकि सर्वे में उम्मीद है कि जीएसटी से आय बढ़ने के साथ है टैक्स कलेक्शन में बढ़त देखने को मिलेगी। सर्वे की माने तो अर्थव्यवस्था में मौजूद वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से रिकवरी शुरू होने के संकेत हैं।
सर्वे में कहा गया है कि लो 2020-21 में विकास दर में रिकवरी के मजबूत संकेत हैं। हालांकि ये भी साफ कहा गया कि अगर सरकारी खर्च मे कटौती होती है इसका बुरा असर देखने को मिलेगा। सर्वे में वित्त वर्ष 2020 में टैक्स कलेक्शन अनुमान से कम रहने की बात कही गई है, वहीं सर्वे में आगाह किया गया है कि गैर कर आय में बढ़ोतरी लंबे समय तक संभव नही है। सर्वे में साफ कहा गया है कि जीएसटी कलेक्शन केंद्र और राज्यों की आय के लिए को बेहतर बनाने की सबसे अहम कड़ी है।
