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निवेशकों को लुभाने वाली ई-कॉमर्स कंपनियां भारतीय स्‍मार्टफोन यूजर्स को अपना दीवाना बनाने में हैं असफल

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Dec 20, 2015 07:59 am IST,  Updated : Dec 20, 2015 07:59 am IST

ई-कॉमर्स कंपनियों ने वेंचर कैपिटल इनवेस्‍टमेंट को जितना अपनी ओर आकर्षित किया है, उतनी सफलता स्‍मार्टफोन उपभोक्‍ताओं को आकर्षित करने में नहीं मिली है।

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निवेशकों को लुभाने वाली ई-कॉमर्स कंपनियां भारतीय स्‍मार्टफोन यूजर्स को अपना दीवाना बनाने में हैं असफल

नई दिल्‍ली। ई-कॉमर्स कंपनियों ने वेंचर कैपिटल इनवेस्‍टमेंट को जितना अपनी ओर आकर्षित किया है, उतनी सफलता इन कंपनियों को उपभोक्‍ताओं को आकर्षित करने में नहीं मिली है। ई-कॉमर्स स्‍टार्टअप्‍स ने भारत में वेंचर कैपिटल इनवेस्‍टमेंट का एक बहुत बड़ा हिस्‍सा अपनी ओर आकर्षित करने में सफलता पाई है, लेकिन यह कंपनियां उपभोक्‍ताओं को ज्‍यादा आकर्षित करने में पीछे हैं, विशेषकर मोबाइल पर उपभोक्‍ताओं की संख्‍या आशानुरूप नहीं है।

वर्ष 2015 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मोबाइल ऐप डाउनलोड के आधार पर ट्रेवल कैटेगरी- जिसमें ऑन-डिमांड टैक्‍सी एग्रीगेटर्स शामिल हैं- सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय रही है। मोबाइल एडवर्टाइजिंग फर्म इनमोबी द्वारा उपलब्‍ध आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से सितंबर के दौरान भारत में कुल डाउनलोड मोबाइल ऐप में 48 फीसदी हिस्‍सेदारी ट्रेवल कैटेगरी की है।

टॉप थ्री कैटेगरी में मोबाइल कॉमर्स का कोई स्‍थान नहीं है , इसकी रैंक चौथी है। पिछले तिमाही की तुलना में जुलाई-सितंबर के दौरान मोबाइल कॉमर्स ऐप डाउनलोड करने की संख्‍या में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इनमोबी ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में उपयोग किए गए सैंपल का आकार नहीं बताया है। बेंगलुरु की इस कंपनी का यूजर बेस 1.4 अरब यूजर्स तक पहुंच चुका है।

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इनमोबी ने अपने एक बयान में कहा है कि स्‍मार्टफोन और टैबलेट्स दोनों यूजर्स के बीच ट्रेवल कैटेगरी सबसे ज्‍यादा पसंदीदा कैटेगरी है। लेकिन जब ऑनलाइन शॉपिंग की बात आती है तो मोबाइल की तुलना में टैबलेट्स प्राथमिकता वाला डिवाइस है। इनमोबी ने कहा है कि मोबाइल की तुलना में टैबलेट्स की स्‍क्रीन साइज ज्‍यादा बड़ी होती है, जिससे कंज्‍यूमर को शॉपिंग में ज्‍यादा आसानी होती है। इसलिए जब एक कंज्‍यूमर ऐप के जरिये किसी प्रोडक्‍ट की ब्राउजिंग या शॉपिंग करता है तो वह मोबाइल की तुलना में टैबलेट्स को पहली प्राथमिकता देता है।

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यहां तक कि जब अधिकांश बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी वेबसाइट बंद कर पूरी तरह से ऐप पर निर्भर हो गई है, तब भी ऐप और बेवसाइट के बीच बहस लगातार छिड़ी हुई है। इस मुद्दे पर बहुत से एंट्रेप्रेन्‍योर्स के विचार विरोधाभासी हैं। इनमोबी की इस ताजा रिसर्च से पता चलता है कि सभी विभिन्‍न कैटेगरी में, जब इंटरनेट असेसिंग की बात आती है तो भारतीय यूजर्स वेबसाइट के बजाये ऐप को चुनना पसंद कर रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि वेबसाइट ज्‍यादा डाटा कंज्‍यूम करती है, जबकि वेबसाइट की तुलना में ऐप कम डाटा कंज्‍यूम करता है।

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