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World Bank: लगातार 5वें साल भी मंदी की चपेट में रहेंगे विकासशील देश, भारत पर नहीं होगा असर

 Published : Dec 09, 2015 03:13 pm IST,  Updated : Dec 09, 2015 03:15 pm IST

विश्‍व बैंक ने कहा है कि दुनिया के उभरते बाजार पांचवें साल मंदी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश के चलते भारत की स्थिति मजबूत है।

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World Bank: लगातार 5वें साल भी मंदी की चपेट में रहेंगे विकासशील देश, भारत पर नहीं होगा असर

वाशिंगटन। विश्‍व बैंक ने कहा है कि दुनिया भर के उभरते बाजार लगातार पांचवें साल मंदी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश के चलते भारत की स्थिति दूसरी अर्थव्‍यवस्‍थाओं के मुकाबले थोड़ी मजबूत जरूर है। भारत के अलावा चीन और मेक्सिको ने भी मंदी से मुकाबले के लिए बेहतर रणनीति पेश की है। विश्‍व बैंक ने यह भी कहा कि वैश्विक मंदी का दौर अनुमान से ज्‍यादा लंबा खिंच रहा है। फिलहाल इससे राहत की उम्‍मीद नहीं है।

2010 से अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर जारी है मंदी का कहर

विश्वबैंक ने अपनी रिपोर्ट, उभरते बाजारों में नरमी(कठिन समय या दीर्घकालिक कमजोरी) में कहा है कि 2010 से उभरते बाजारों की ग्रोथ पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुस्‍ती, कैश फ्लो में मंदी और कमोडिटी की घटती कीमत के अलावा दूसरी चुनौतियों का प्रभाव पड़ा है। इससे उत्पादकता में कमी और राजनीतिक अनिश्चितता बढने से घरेलू समस्याएं और भी बढ़ी हैं। उभरते बाजार की वृद्धि 2010 से नरम पड़ रही है। 2010 में यह 7.6 प्रतिशत थी जिसके इस साल चार प्रतिशत पर आने की उम्मीद है। विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष कौशिक बसु ने कहा लंबे समय तक बेहतर ग्रोथ रेट हासिल करने के बावजूद उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाएं मंदी की चपेट में आ गई हैं।

गरीबी दूर करने के लक्ष्‍य को मुश्किल बनाएगी मंदी

बसु ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि में गिरावट से वह देशों में गरीबी को दूर करने का लक्ष्य और कठिन हो जाएगा। क्योंकि गिरावट इन देशों की अर्थव्‍यवस्‍था में गहराई तक समाती जा रही है। जिसके चलते इससे निपटना और भी मुकिश्‍ल होता जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि उभरते बाजार में नरमी इन बाजारों में वृद्धि के सुनहरे दौर के बाद आई है। गौरतलब है कि 1980 के दशक की शुरुआत के बाद से अगले दो दशक में उभरते बाजारों का वैश्विक जीडीपी में योगदान लगभग दोगुना हो गया है। 2010-14 के दौरान वैश्विक वृद्धि में उनका योगदान करीब 60 प्रतिशत रहा।

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