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भारत-बांग्लादेश सीमा पर 55 दिनों से खड़े हैं ट्रक, निर्यातकों ने सरकार से की शिकायत

व्यापारियों ने बताया कि प्रशासनिक कारणों से यह देरी हो रही है। हालांकि बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की हालिया घटनाओं से फिलहाल व्यापार में कोई बाधा नहीं आई है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Oct 21, 2021 09:40 am IST, Updated : Oct 21, 2021 09:40 am IST
भारत-बांग्लादेश सीमा...- India TV Paisa
Photo:PTI

भारत-बांग्लादेश सीमा पर 55 दिनों से खड़े हैं ट्रक, निर्यातकों ने सरकार से की शिकायत

कोलकाता। भारत और बांग्लादेश सीमा पर इस समय ट्रकों का जमावड़ा है। कई ट्रक 55 दिनों से सीमा पार जाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर दुर्गापूजा और अन्य छुट्टियों के चलते ट्रकों को परमिट मिलने में देरी हो रही है। सबसे खराब हालात पेट्रापोल और घोजाडांगा सीमा पर है, जहां ट्रकों की लंबी कतारें देखी जा सकती है। 

बता दें कि यहां से कुल 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। हालांकि दोनों देशों के निर्यातकों ने बताया कि बंगलादेश के कई जिलों में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों की हालिया घटनाओं से फिलहाल व्यापार में कोई बाधा नहीं आई है।

भारतीय निर्यातकों ने बांग्लादेश के लिए माल ले जा रहे ट्रकों के लिए पेट्रापोल और घोजाडांगा जमीनी सीमाओं पर लंबी प्रतीक्षा अवधि को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। निर्यातकों ने बुधवार को बताया कि माल निर्यात करने वाले ट्रकों को एक महीने से अधिक समय के लिए रोका हुआ है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन (पूर्व) सुशील पटवारी ने कहा, “ट्रकों की लंबी प्रतीक्षा अवधि के कई कारण है। दोनों देशों से निर्यात की मात्रा बढ़ी है और दुर्गा पूजा की छुट्टियों ने समस्या को और बढ़ा दिया है।” 

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में पेट्रापोल क्षेत्र, बांग्लादेश के साथ सबसे बड़ी भूमि व्यापार सीमा है। घोजाडांगा भी इसी जिले में है। पेट्रापोल-बेनापोल (बांग्लादेश) व्यापार और यात्री आवाजाही दोनों के मामलों में दो पड़ोसी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण भूमि सीमा क्षेत्र है। 

पटवारी ने कहा, “पहले सीमा पार करने से पहले रुकने की अवधि लगभग 15 दिन थी, जो अब यह एक महीने से अधिक हो गई है। वर्तमान में निर्यात के लिए माल ले जा रहे लगभग 250 ट्रक एक बार में सीमा पार करते हैं, लेकिन यदि सीमा शुल्क अधिकारी थोड़ा अतिरिक्त प्रयास करें, तो यह संख्या बढ़ सकती है।” 

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