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एक साल में लगे 37 मोबाइल कारखाने, 40,000 को प्रत्यक्ष और 1.25 लाख लोगों को मिला अप्रत्यक्ष रोजगार

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Aug 28, 2016 12:27 pm IST,  Updated : Aug 28, 2016 12:27 pm IST

भारत में पिछले एक साल में 37 मोबाइल कंपनियों ने अपने कारखाने लगाए जिनमें 40,000 लोगों को सीधे और 1.25 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार मिला।

एक साल में लगे 37 मोबाइल कारखाने, 40,000 को प्रत्यक्ष और 1.25 लाख लोगों को मिला अप्रत्यक्ष रोजगार- India TV Hindi
एक साल में लगे 37 मोबाइल कारखाने, 40,000 को प्रत्यक्ष और 1.25 लाख लोगों को मिला अप्रत्यक्ष रोजगार

नई दिल्ली। भारत में पिछले एक साल में 37 मोबाइल कंपनियों ने अपने कारखाने लगाए जिनमें 40,000 लोगों को सीधे और 1.25 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार मिला। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, हमने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनाने का फैसला किया है। पिछले एक साल में 37 नई मोबाइल विनिर्माण इकाइयां यहां लगी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान देश में 11 करोड़ मोबाइल फोन बने हैं जबकि इससे पिछले साल छह करोड़ फोन बने थे।

प्रसाद ने कहा, हमने 40,000 लोगों को सीधे रोजगार दिया जबकि 1.25 लाख को अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला है। चीन की जियोनी और शियोमी जैसे कंपनियां आंध्रप्रदेश के फॉक्सकॉन संयंत्र में अपने हैंडसेट बना रही हैं। कारबॉन, लावा, माइक्रोमैक्स, इंटेक्स, जिवी, आईटेल और एमटेक जैसी घरेलू कंपनियों ने भी देश में अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए हैं। उद्योग सूत्रों के मुताबिक चीन की कंपनी लीको मंगलवार को मोबाइल विनिर्माण इकाई का परिचालन शुरू करेगी। प्रसाद ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रानिक उत्पाद के विनिर्माण के अलावा उत्पाद डिजाइन भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए उद्यमियों को मदद करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक विकास कोष के तहत 10,000 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं।

तस्वीरों में देखिए काम करने के लिहाज से टॉप 5 कंपनियां

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दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में बने इलेक्ट्रोप्रेन्योर पार्क का उद्घाटन किया गया जो करीब 21 करोड़ रुपए के सरकारी कोष से स्थापित इन्कयूबेशन केंद्र है और यहां 50 कंपनियों को इन्कयूबेशन में मदद मिलेगी। सूचना प्रौद्योगिकी और विधि एवं न्याय राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने कहा, भारत तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का आयात करता है। 2020 तक सरकार ने आयात घटाकर शून्य करने का लक्ष्य रखा है। इलेक्ट्रोप्रेन्योर पार्क इस दिशा में उठाया गया एक कदम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने छह स्टार्ट-अप कंपनियों का चुनाव किया है जो इस इन्कयूबेशन केंद्र में उत्पाद विकसित करेंगी। मेइटी के अतिरिक्त सचिव अजय कुमार ने कहा, 176 स्टार्टअप में छह का चुनाव किया गया है जिसका अर्थ है उनमें अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों के विकास की क्षमता है और छह अन्य के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।

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