नई दिल्ली। ग्लोबल अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बावजूद चालू वित्त वर्ष में अन्य एशियाई करेंसी के मुकाबले रुपए की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। चीन की करंसी युआन को पछाड़ भारतीय रुपया ने एशिया की टॉप 5 करेंसी की लिस्ट में जगह बनाने में कामयाब रहा। रुपए ने इस चालू वित्त वर्ष के दौरान 1.04 फीसदी का कुल रिटर्न दिया है। रुपए ने एशियाई बाजारों में चौथा स्थान हासिल किया है। एशिया की टॉप करेंसी की लिस्ट में इंडोनेशिया का रुपया, जापानी येन और सिंगापुर के डॉलर के बाद भारत का रुपए को स्थान मिला है।
रघुराम राजन का कमाल
ब्लूमबर्ग के अनुसार, भारतीय रुपए के इस मुकाम का श्रेय आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन को जाता है। राजन ने अनिश्चितता के दौर में भी मजबूत स्थिति कायम रखी। राजन के नेतृत्व में आरबीआई ने करंसी फ्यूचर मार्केट में दखल दिया है, ताकि अस्थिरता को कम से कम किया जा सके। आरबीआई कभी मार्केट में दखल को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करता है, इस काम को सरकारी बैंक ही अंजाम देते हैं।
युआन से ज्यादा रुपए ने दिया रिटर्न
ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, रुपए ने इस दौरान 1.04 फीसदी का कुल रिटर्न हासिल की। वहीं, युआन ने 0.24 फीसदी का रिटर्न हासिल किया। करंसी के कुल रिटर्न में स्पॉट एक्सचेंज रेट और इंटरेस्ट इनकम भी शामिल हैं। आरबीआई कभी मार्केट में दखल को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करता है, इसे काम को सरकारी बैंक ही अंजाम देते हैं। वहीं, एक्सचेंज रेट के लिए 2013 सबसे अस्थिरता वाला साल रहा है, जब तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के नेतृत्व में रुपए और डॉलर के बीच 59-60 का अंतर था। अगस्त 2013 में ही रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले 68.85 तक जा पहुंची।