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बड़ी मुसीबतों से बाहर निकला अडाणी ग्रुप, ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी बोली- विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद बढ़ी

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 24, 2026 02:57 pm IST,  Updated : May 24, 2026 02:57 pm IST

बर्नस्टीन ने कहा कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) से जुड़े मामले के समाधान और अमेरिकी अभियोजकों द्वारा ग्रुप के खिलाफ आरोप हटाने की प्रक्रिया ने ग्रुप के शेयरों पर बना बड़ा दबाव कम कर दिया है।

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गौतम अडाणी, चेयरमैन, अडाणी ग्रुप Image Source : GAUTAM ADANI

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने कहा है कि अडाणी ग्रुप से जुड़े बड़े विवाद और अमेरिकी नियामकीय जांच का जोखिम अब काफी हद तक पीछे छूट चुका हैं। इससे ग्रुप में विदेशी निवेश और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है। ब्रोकरेज कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में ग्रुप की 4 प्रमुख लिस्टेड कंपनियों- अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशन इकॉनमिक जोन, अडाणी ग्रीन एनर्जी, अडाणी पावर और अंबुजा सीमेंट का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में सामने आए शॉर्ट-सेलर विवाद और बाद में अमेरिका में शुरू हुई जांच के कारण कई विदेशी निवेशकों और ग्लोबल फंड्स ने अडाणी ग्रुप से दूरी बना ली थी। हालांकि, अब अमेरिकी मामलों में राहत मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है। 

4 सालों में अडाणी ग्रुप ने दो बड़े झटके

बर्नस्टीन ने कहा कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) से जुड़े मामले के समाधान और अमेरिकी अभियोजकों द्वारा ग्रुप के खिलाफ आरोप हटाने की प्रक्रिया ने ग्रुप के शेयरों पर बना बड़ा दबाव कम कर दिया है। इसके बावजूद कई शेयर अभी भी संकट से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले 4 सालों में ग्रुप ने दो बड़े झटके झेले। पहला जनवरी, 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और दूसरा नवंबर, 2024 से शुरू हुए अमेरिकी SEC और न्याय विभाग की जांच से जुड़ा घटनाक्रम। 

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप पर लगाए थे कई बड़े आरोप

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप पर शेयरों में हेरफेर, टैक्स हेवन के दुरुपयोग और अकाउंटिंग में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और मार्केट कैप में अरबों डॉलर की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण बताया था। इसी बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ज्यादातर जांच पूरी हो चुकी है और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे व्यापक बाजार हस्तक्षेप की जरूरत हो। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि अब हिंडनबर्ग रिसर्च ने अब अपना परिचालन बंद कर दिया है। 

बड़े पैमाने पर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की क्षमता बड़ी ताकत

बर्नस्टीन के अनुसार, बड़े पैमाने पर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की क्षमता अडाणी ग्रुप की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, थर्मल पावर और रीन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में ग्रुप लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कंटेनर पोर्ट बाजार में अडाणी ग्रुप की हिस्सेदारी अब लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हालांकि, रिपोर्ट में ये भी स्वीकार किया गया कि सितंबर, 2024 के बाद तेज पूंजीगत निवेश के कारण ग्रुप का कुल शुद्ध कर्ज करीब 1,00,000 करोड़ रुपये बढ़ा है। इसके बावजूद आय में मजबूत वृद्धि जारी है और वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच ग्रुप की कर पूर्व आय (एबिटा) में सालाना 22 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है। 

अडाणी ग्रुप के फंडिंग सोर्स में आई विविधता

ब्रोकरेज का कहना है कि अडाणी ग्रुप के फंडिंग सोर्स में भी विविधता आई है। घरेलू बैंकों पर निर्भरता घटाते हुए ग्रुप ने बॉन्ड वित्त को बढ़ावा दिया है। हालिया अमेरिकी घटनाक्रम के बाद डॉलर कोष तक पहुंच और बेहतर हो सकती है। रिपोर्ट में ये निष्कर्ष निकाला गया कि विवादों और जांचों के बावजूद अडाणी ग्रुप की परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उसकी मजबूत मौजूदगी उसे भारत की विकास कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए हुए है।

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