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अदाणी विल्मर से Adani Group के बाहर होने पर आई ये बड़ी खबर, कंपनी से साझा की नई रणनीति

Edited By: Alok Kumar @alocksone Published : Jan 05, 2025 08:34 pm IST, Updated : Jan 05, 2025 08:34 pm IST

अदाणी ग्रुप FMCG ज्वाइंट वेंचर अदाणी विल्मर से पूरी तरह बाहर निकल रहा है। ग्रुप ने कहा है कि अदाणी विल्मर की 31.06 प्रतिशत हिस्सेदारी विल्मर इंटरनेशनल को बेची जाएगी। वहीं बाकी 13 प्रतिशत हिस्सेदारी खुले बाजार के जरिए बेची जाएगी।

Adani Wilmar- India TV Paisa
Photo:FILE अदाणी विल्मर

भारत की सबसे बड़ी खाद्य तेल कंपनी अदाणी विल्मर लिमिटेड (एडब्लूएल) से अदाणी ग्रुप ने निकलने का फैसला किया है। अब विल्मर ने आगे की कारोबारी रणनीति का खुलासा किया है। कंपनी ने बताया कि वह अपने उच्च-मार्जिन वाले FMCG कारोबार को बढ़ाने पर जोर देगी। सूत्रों के अनुसार विल्मर आईटीसी के समान रणनीति अपनाते हुए अपने मुख्य व्यवसाय और व्यापक वितरण नेटवर्क का लाभ उठाने की तैयारी कर रही है। आईटीसी ने एफएमसीजी में विस्तार करने के लिए अपने मजबूत सिगरेट व्यवसाय का इस्तेमाल किया, उसी तरह एडब्लूएल अपने प्रमुख खाद्य तेल व्यवसाय का उपयोग एफएमसीजी वृद्धि के लिए आधार के रूप में करने के लिए तैयार है। 

वैश्विक FMCG को भारत में लॉन्च की तैयारी 

मामले से अवगत सूत्रों ने कहा कि अदाणी समूह के बाहर निकलने के बाद, विल्मर भारतीय बाजार में अधिक वैश्विक एफएमसीजी ब्रांडों को पेश कर सकती है। दिसंबर तिमाही में एडब्ल्यूएल के एफएमसीजी व्यवसाय ने मात्रा के लिहाज से सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। कुल बिक्री की मात्रा में खाद्य और एफएमसीजी की हिस्सेदारी बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई। इस खंड की कुल राजस्व में हिस्सेदारी बढ़कर नौ प्रतिशत हो गई। 

FMCG कंपनियों का मुनाफा घटेगा

आसमान छूती महंगाई, हाई प्रोडक्शन कास्ट और प्राइस कम्पेटिटिवेनेस्स के चलते अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे में गिरावट आने की आशंका है। इसके अलावा इन कंपनियों का परिचालन लाभ भी काफी कम या स्थिर रह सकता है। कई एफएमसीजी कंपनियों के राजस्व में निचले स्तर पर एकल अंक की वृद्धि की उम्मीद है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि कई कंपनियों ने दिसंबर तिमाही में कोपरा, वनस्पति तेल और पाम ऑयल जैसे उत्पादों की बढ़ती लागत के कारण कीमतों में बढ़ोतरी का विकल्प चुना है। कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति के कारण कम खपत ने शहरी बाजार को प्रभावित किया है। 

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