वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में देश में सेमीकंडक्टर सहित मैनुफैक्चरिंग क्षमता को तेजी से मजबूत करने पर जोर देने की घोषणा की। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करेंगे और टेक और स्किल्ड वर्कफोर्स डेवलप करने के लिए इंडस्ट्री के नेतृत्व वाले रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर भी फोकस करेंगे। सीतारमण ने कहा कि 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए एक योजना शुरू की गई थी। अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को डेडिकेटेड रेयर-अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में मदद करने का प्रस्ताव देते हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को ISM 2.0 लॉन्च करके बढ़ाया जाएगा, और घरेलू प्रोडक्शन और इनोवेशन को मज़बूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए खर्च को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया जाएगा।
बायोफार्मा शक्ति योजना शुरू होगी
सरकार ने रणनीतिक और उभरते (फ्रंटियर) क्षेत्रों में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कई अहम कदमों का ऐलान किया है। इन पहलों का उद्देश्य भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करना है। इसके तहत बायोफार्मा शक्ति योजना शुरू की जाएगी, जिससे भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट (CIE) क्षेत्र को मजबूती देने के लिए एक नई योजना भी पेश करेगी। वहीं कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम शुरू की जाएगी, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही देशभर में 200 पुराने (लीगेसी) औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने के लिए भी एक नई योजना लाई जाएगी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारत 2026 से सेमीकंडक्टर चिप्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने की दिशा में तय समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। यह लक्ष्य जनवरी 2022 में शुरू किए गए पहले इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत तय किया गया था। उन्होंने बताया कि 2026 में देश में पहली बार सेमीकंडक्टर चिप्स का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा। इसके लिए चार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट इस साल संचालन शुरू करने की तैयारी में हैं। वहीं तीन प्लांट्स में 2025 से पायलट प्रोडक्शन पहले ही शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भारत, वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपेक्स, ऊर्जा क्षेत्र और किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) जैसे अहम सेक्टर्स पर खर्च को प्राथमिकता देगा।