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सीजफायर टूटा तो दुनिया पर आएगा बड़ा संकट! वर्ल्ड बैंक के चीफ अजय बंगा की चेतावनी, हालात होंगे बेकाबू

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 12, 2026 09:59 am IST,  Updated : Apr 12, 2026 09:59 am IST

ईरान से जुड़े युद्ध का असर अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। वर्ल्ड बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने चेतावनी दी है कि भले ही युद्धविराम हो जाए, लेकिन इसके आर्थिक झटके लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे। अगर सीजफायर टूटता है, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

अजय बंगा ने बताया...- India TV Hindi
अजय बंगा ने बताया सीजफायर टूटने का पूरा सीन Image Source : ANI

ईरान से जुड़े संघर्ष के आर्थिक असर अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। इसी बीच विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने दुनिया को चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा सीजफायर टूटता है, तो इसके नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि भले ही युद्ध थम जाए, लेकिन इसका असर लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बना रहेगा।

अजय बंगा के मुताबिक, अगर सीजफायर कायम रहता है, तब भी वैश्विक आर्थिक विकास दर (ग्लोबल ग्रोथ) में 0.3% से 0.4% तक गिरावट आ सकती है। लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं और सीजफायर टूट जाता है, तो यह गिरावट 1% तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर बिजनेस, एनर्जी मार्केट और फाइनेंशियल सिस्टम पर पड़ेगा।

महंगाई बढ़ने का खतरा

इस संकट का एक बड़ा असर महंगाई पर भी देखने को मिल सकता है। बंगा ने बताया कि सीजफायर रहने पर भी महंगाई 0.2% से 0.3% तक बढ़ सकती है। वहीं अगर संघर्ष लंबा चलता है, तो यह बढ़कर 0.9% तक पहुंच सकती है। सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा, जहां महंगाई 6.7% तक जा सकती है।

ऊर्जा संकट से बढ़ेगी मुश्किल

वर्ल्ड बैंक ने पहले ही उन देशों से बातचीत शुरू कर दी है जो ऊर्जा आयात पर ज्यादा निर्भर हैं। खासकर छोटे द्वीपीय देश इस संकट से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे देशों के लिए इमरजेंसी फंडिंग की तैयारी भी की जा रही है।

सरकारों को दी सख्त सलाह

अजय बंगा ने सरकारों को चेताया है कि वे ऐसी ऊर्जा सब्सिडी में न फंसें जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हैं। इससे भविष्य में वित्तीय अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि देशों को अपने एनर्जी सोर्स में विविधता लाने पर ध्यान देना चाहिए।

नाइजीरिया का उदाहरण दिया

बंगा ने नाइजीरिया का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 20 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। इससे देश न सिर्फ आत्मनिर्भर बना, बल्कि पड़ोसी देशों को ईंधन निर्यात करने में भी सक्षम हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में परमाणु, पवन, सोलर और हाइड्रो जैसी वैकल्पिक ऊर्जा पर ध्यान देना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो देश फिर से पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हो जाएंगे, जिससे आर्थिक और पर्यावरणीय खतरे बढ़ सकते हैं।

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