सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने बुधवार को बताया कि सितंबर तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में उसका कंसोलिडेटेड मुनाफा 32% घटकर ₹4,262.64 करोड़ रह गया है। कंपनी ने इस गिरावट का कारण कम बिक्री और बढ़े हुए खर्च बताया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही (जुलाई-सितंबर 2024) में कंपनी को ₹6,274.80 करोड़ का मुनाफा हुआ था।
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संयुक्त बिक्री में गिरावट
खबर के मुताबिक, कंपनी की संयुक्त बिक्री (कंसोलिडेटेड सेल्स) घटकर ₹26,909.23 करोड़ रह गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में ₹27,271.30 करोड़ थी। वहीं, कंपनी के कुल खर्च 7% बढ़कर ₹26,421.86 करोड़ हो गए, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹24,670.70 करोड़ थे। कोल इंडिया देश की कुल कोयला उत्पादन का 80% से अधिक हिस्सा अपने खाते में रखती है।
सितंबर में कंपनी का कोयला उत्पादन 3.9% घटकर 48.97 मिलियन टन (एमटी) रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 50.94 मिलियन टन था। यह गिरावट उस समय आई है जब सरकार ने कोयला आयात कम करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
इन वजहों से खनन में आई अ्ड़चन
कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पहले बताया था कि सितंबर में बारिश के कारण खनन गतिविधियों में बाधा आई, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया का उत्पादन घटा। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारी वर्षा और जलभराव के कारण मॉनसून के दौरान कोयला खनन में परिचालन संबंधी कठिनाइयां आती हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है। कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 875 मिलियन टन उत्पादन और 900 मिलियन टन डिस्पैच (भेजने) का लक्ष्य तय किया है।