आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र के आम किसान इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। प्रमुख नकदी फसल तोतापुरी आम की अच्छी पैदावार के बावजूद बाजार में कीमतों में गिरावट और सीमित खरीदारी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। चित्तूर, तिरुपति और अन्नामय्या जिलों के किसान खासतौर पर प्रभावित हैं, क्योंकि पल्प उद्योग कम मांग और निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का हवाला देते हुए पर्याप्त मात्रा में खरीद नहीं कर रहा है।ऐसे में किसानों ने भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से अपील की है कि वह आगे आकर इन फलों की खरीद करे ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हो सके।
तिरुपति के एक आम किसान एम. भानु प्रकाश ने बताया कि किसान किसी राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते, वे केवल अपनी आजीविका बचाने और फसलों के लिए उचित मूल्य की गारंटी चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तेलुगु देशम पार्टी (तेदपा) के नेतृत्व वाली सरकार ने ₹4 प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य देने का वादा किया था, लेकिन उसमें देरी हो रही है। इस बीच परिवहन और श्रमिक लागत में बढ़ोतरी ने किसानों की समस्याओं को और जटिल बना दिया है।
इस साल रिकॉर्ड आम का उत्पादन
आंध्र प्रदेश के आम किसानों को इस वर्ष तोतापुरी आम की बंपर पैदावार के बावजूद भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। तिरुपति के किसान एम. भानु प्रकाश के अनुसार, इस बार उत्पादन बढ़कर करीब 1.5 लाख टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 90,000 टन था। अधिक आपूर्ति के कारण बाजार में मांग गिर गई और कीमतों में तेज़ गिरावट आई। प्रकाश ने आंध्र प्रदेश में एक संगठित आम बोर्ड के गठन की मांग करते हुए सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन और किसानों की भागीदारी के बावजूद अब तक कोई ठोस ढांचा उनके समर्थन के लिए क्यों नहीं बना है।
इस बीच, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बताया कि आम किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने मंडी हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत राज्य को 130 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि राज्य सरकार ने कुल 260 करोड़ रुपये की राशि जारी की है, जिसमें से चार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों को भुगतान किया गया है। MIS के तहत केंद्र ने इसका 50% हिस्सा वहन किया है।
किसानों का कहना है कि नीति समर्थन में देरी, बढ़ती परिवहन व श्रम लागत और निर्यात की सीमित संभावनाएं मौजूदा संकट को और गहरा कर रही हैं। उनका साफ कहना है कि वे राजनीतिक विवादों से दूर रहकर केवल अपनी आजीविका की रक्षा और स्थायी समाधान चाहते हैं।
जमीन बेचने को मजबूर किसान
चित्तूर के एक अन्य आम किसान एस.वी.सुब्बाराव ने बताया कि फसल की खरीद असफल होने तथा बढ़ते कर्ज के कारण उन्हें अपनी 50 एकड़ पैतृक भूमि में से 20 एकड़ भूमि बेचनी पड़ी। किसानों ने कर्नाटक और तमिलनाडु की तुलना में भेदभाव का आरोप लगाया, जहां सरकारों ने क्रमशः 18 रुपये और पांच रुपये प्रति किलोग्राम तक समर्थन मूल्य की गारंटी दी, जबकि आंध्र प्रदेश का समर्थन मूल्य कम है। किसानों ने सुझाव दिया कि राज्य के मंदिर खासकर टीटीडी, मंदिर की रसोई के लिए आम खरीदकर मदद कर सकते हैं। प्रकाश ने कहा, टीटीडी रोजाना करोड़ों रुपये कमाता है और हजारों श्रद्धालुओं को खाना खिलाता है। वे आसानी से सीधे किसानों से आम खरीद सकते हैं। इस सत्र में 6.5 लाख टन उत्पादन और घटती मांग के कारण किसानों को बढ़ते कर्ज का डर सता रहा है। उन्होंने इस बार-बार आने वाले संकट को समाप्त करने के लिए स्थायी समाधान की मांग की है।



































