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अडानी का मिशन वैदिक रिवाइवल! बोले- अब भारत दुनिया को दिखाएगा अपना प्राचीन विज्ञान

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Nov 21, 2025 03:08 pm IST,  Updated : Nov 21, 2025 03:08 pm IST

गौतम अडानी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी सोच सिर्फ उद्योगों या बिज़नेस तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक धरोहर के पुनर्जागरण से भी गहराई से जुड़ी है।

गौतम अडानी का मिशन...- India TV Hindi
गौतम अडानी का मिशन वैदिक रिवाइवल! Image Source : GAUTAM ADANI YOUTUBE

दुनिया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य की तरफ दौड़ रही है, भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक गौतम अडानी ने एक ऐसा विजन सामने रखा है जिसने पूरी बहस की दिशा ही बदल दी है। अडानी का कहना है कि भारत का भविष्य सिर्फ टेक्नोलॉजी में नहीं, बल्कि अपनी उन जड़ों में छिपा है जिन्हें सदियों तक मिटाने की कोशिश की गई- भारत का वैदिक ज्ञान, प्राचीन विज्ञान और सांस्कृतिक स्मृति। अडानी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव में उन्होंने भारत को अपने ही भूले हुए ज्ञान की ओर लौटने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में अडानी ने अपने पर्सनल अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुंदरता, भक्ति और धर्म के मायने उन्होंने कहानियों से नहीं, बल्कि परिवार की परंपराओं से सीखे। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि इंडोलॉजी आखिर इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? उनके अनुसार इंडोलॉजी सिर्फ इतिहास का अध्ययन नहीं, बल्कि दर्शन, कला, चिकित्सा, गणित, आर्किटेक्चर, भाषा और शासन का अध्ययन है, जो भारत की असली बौद्धिक रीढ़ बनता है।

अडानी ने नालंदा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी चोटें तलवार से नहीं, ज्ञान के विनाश से आईं। उन्होंने कहा कि सभ्यताएं तब नहीं गिरतीं जब दुश्मन हमला करता है… वे तब गिरती हैं जब उनकी स्मृति असुरक्षित छोड़ दी जाती है। आज वही खतरा नए रूप में सामने है। अडानी ने चेतावनी दी कि आधुनिक हमल’ किसी सेना की तरह नहीं आते, बल्कि सुविधा के उपकरण बनकर आते हैं। डिजिटल माध्यम, एल्गोरिद्म और वह टेक्नोलॉजी जो धीरे-धीरे समाज के सोचने का तरीका तय करने लगती है। उन्होंने इसे सॉफ्ट वॉरफेयर सांस्कृतिक स्मृति की लड़ाई बताया।

इंडोलॉजी और AI को जोड़ते हुए उन्होंने तीन बड़े खतरे बताए

  • अदृश्य हो जाने का खतरा, यानी जो ज्ञान डिजिटाइज नहीं हुआ, वह भविष्य से मिट जाएगा।
  • सांस्कृतिक संक्षेपण, क्योंकि बड़े AI मॉडल जटिल भारतीय ज्ञान को ‘सिंप्लिफाई’ करके उसका असली सार खत्म कर देते हैं।
  • विदेशी दृष्टिकोण का आकलन, पश्चिमी मानकों पर बने AI मॉडल भारतीय परंपराओं को गलत तरीके से जज करते हैं।

इस चुनौती से निपटने के लिए अडानी ने पांच समाधान सुझाए, जो हैं- भारत नॉलेज ग्राफ बनाना, इंडियन सेंट्रिक डिजिटल कॉर्पस तैयार करना, विद्वानों को AI सुधार में शामिल करना, इंडोलॉजी AI चेयर बनाना और देश के हर कॉलेज को ‘नई नालंदा’ के रूप में विकसित करना।

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