1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. सर्विस सेक्टर को हाई डिमांड ने लगाए पंख, नवंबर में ग्रोथ रही जोरदार, PMI इतने पर पहुंचा

सर्विस सेक्टर को हाई डिमांड ने लगाए पंख, नवंबर में ग्रोथ रही जोरदार, PMI इतने पर पहुंचा

 Published : Dec 03, 2025 03:12 pm IST,  Updated : Dec 03, 2025 03:12 pm IST

नवंबर में भारत का सर्विसेज PMI 58.9 से बढ़कर 59.8 हो गया, जिसका सीधा कारण मजबूत नए बिज़नेस ऑर्डर्स हैं। इनपुट कीमतों में बढ़ोतरी लगभग साढ़े पांच साल के न्यूनतम स्तर पर रही।

अच्छी खबर मुद्रास्फीति के मोर्चे पर है।- India TV Hindi
अच्छी खबर मुद्रास्फीति के मोर्चे पर है। Image Source : FREEPIK

अक्टूबर में हल्की सुस्ती के बाद, भारत के सेवा क्षेत्र की ग्रोथ नवंबर में तेज हो गई है। बुधवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, इस सुधार को मुख्य रूप से नई बिज़नेस मांगों में आई जबरदस्त तेजी और कीमतों पर नरम दबाव से बल मिला। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सीजनली एडजस्टेड HSBC इंडिया सर्विसेज PMI बिज़नेस एक्टिविटी इंडेक्स अक्टूबर के 58.9 से बढ़कर नवंबर में 59.8 पर पहुंच गया। बता दें, PMI में 50 से ऊपर का स्कोर विस्तार दर्शाता है।

मुख्य कारक: नई मांग में उछाल

HSBC की मुख्य भारत अर्थशास्त्री, प्रांजल भंडारी ने इस वृद्धि पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नवंबर में भारत का सर्विसेज PMI 58.9 से बढ़कर 59.8 हो गया, जिसका सीधा कारण मजबूत नए बिज़नेस ऑर्डर्स हैं, जिन्होंने उत्पादन वृद्धि को बढ़ावा दिया। यह दिखाता है कि घरेलू बाज़ार में मांग स्थिर बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बिक्री: प्रतिस्पर्धा के कारण रफ्तार धीमी

अंतरराष्ट्रीय बिक्री में सुधार तो जारी रहा, जिसमें कंपनियों ने एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व से मांग बढ़ने की सूचना दी। हालांकि, वृद्धि की यह रफ्तार आठ महीने के निचले स्तर पर आ गई। कड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और दुनिया के अन्य हिस्सों से सस्ती सेवाओं की उपलब्धता ने विदेशी विस्तार की गति को सीमित किया। भंडारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बिक्री आठ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, क्योंकि विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बहुत तीव्र रही।

कीमतों पर दबाव कम

अच्छी खबर मुद्रास्फीति के मोर्चे पर है। इनपुट कीमतों में बढ़ोतरी लगभग साढ़े पांच साल के न्यूनतम स्तर पर रही। इस कारण, सेलिंग प्राइस में भी कंपनियों ने केवल मामूली बढ़ोतरी की, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है।

भविष्य की उम्मीदें

सालभर की आगे की उम्मीदों में नवंबर के दौरान थोड़ी कमी देखी गई। कंपनियों ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा और राज्य विधानसभा चुनावों से संभावित व्यवधानों को लेकर चिंता जताई। इसके बावजूद, मांग में सुधार, सोशल मीडिया की उपस्थिति बढ़ाने, मार्केटिंग योजनाओं और कीमतों को न्यूनतम रखने जैसी रणनीतियों के चलते कंपनियां आगे उत्पादन वृद्धि को लेकर सकारात्मक बनी हुई हैं।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा