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भारत-अमेरिका के बीच 9 जुलाई से पहले ट्रेड डील होने की उम्मीद, एग्रीकल्चर और ऑटोमोबाइल में पेंच फंसा

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jul 04, 2025 05:56 pm IST,  Updated : Jul 04, 2025 05:56 pm IST

एग्रीकल्चर सेक्टर में, अमेरिका डेयरी उत्पादों, सेब, पेड़ों से प्राप्त मेवों और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों जैसे उत्पादों पर शुल्क में रियायतें चाहता है।

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भारत ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में 25 प्रतिशत शुल्क का मुद्दा उठाया Image Source : FILE

अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करने के बाद भारतीय दल वाशिंगटन से लौट आया है। एक अधिकारी ने ये जानकारी देते हुए बताया कि इस समझौते को 9 जुलाई से पहले अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। हालांकि, कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कुछ मुद्दों को अभी भी सुलझाए जाने की जरूरत है, इसलिए चर्चा जारी रहेगी। भारतीय दल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल कर रहे हैं। वे वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव हैं। अधिकारी ने कहा कि बातचीत अंतिम चरण में है और इसके निष्कर्ष की घोषणा 9 जुलाई से पहले होने की उम्मीद है। बताते चलें कि 9 जुलाई को ही डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जवाबी टैरिफ पर लगाई गई 90 दिनों की रोक का आखिरी दिन है।

भारत ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में 25 प्रतिशत शुल्क का मुद्दा उठाया

अधिकारी ने कहा, “भारतीय टीम वाशिंगटन से वापस आ गई है। बातचीत जारी रहेगी। कृषि और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में कुछ मुद्दे हैं जिन्हें हल करने की आवश्यकता है।” भारत ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में 25 प्रतिशत शुल्क को लेकर मुद्दा उठाया है। इसने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की सुरक्षा समिति में इस मामले को उठाया है। भारत ने डब्ल्यूटीओ को ये भी बताया है कि उसने स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिकी टैरिफ के जवाब में चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। 

भारत से बहुत कम ऑटो कंपोनेंट्स इंपोर्ट करता है अमेरिका

भारत ने विश्व व्यापार संगठन को भेजी गई एक चिट्ठी में कहा है कि 26 मार्च, 2025 को अमेरिका ने भारत में बने या वहां से आयात होने वाले यात्री वाहनों और हल्के ट्रकों के साथ कुछ पार्ट्स के आयात पर 25 प्रतिशत मूल्यानुसार शुल्क वृद्धि के रूप में एक उपाय अपनाया है। वाहन कलपुर्जों पर ये उपाय 3 मई, 2025 से असीमित अवधि के लिए लागू होगा। पिछले साल अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर 89 अरब डॉलर के पार्ट्स का आयात किया। इसमें मेक्सिको का हिस्सा 36 अरब डॉलर, चीन का 10.1 अरब डॉलर और भारत का हिस्सा सिर्फ 2.2 अरब डॉलर का था।

कृषि क्षेत्र में रियायत देना कठिन और चुनौतीपूर्ण

एग्रीकल्चर सेक्टर में, अमेरिका डेयरी उत्पादों, सेब, पेड़ों से प्राप्त मेवों और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों जैसे उत्पादों पर शुल्क में रियायतें चाहता है। हालांकि, राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण, भारत के लिए कृषि क्षेत्र में कोई रियायत देना कठिन और चुनौतीपूर्ण होगा। भारत ने अभी तक जितने भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, उनमें से किसी भी व्यापारिक साझेदार के लिए डेयरी सेक्टर को नहीं खोला है। भारत ने अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को शुल्क रियायत देने पर अपना रुख कड़ा कर लिया है। 

26 जून से वाशिंगटन में थी भारतीय टीम

भारतीय टीम 26 जून से 2 जुलाई तक अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए वाशिंगटन में थी। ये बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप के जवाबी शुल्क का निलंबन 9 जुलाई को समाप्त हो रहा है। दोनों पक्ष उससे पहले वार्ता को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहे हैं। बताते चलें कि अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाया था, लेकिन इसे 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया था। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत मूल शुल्क अभी भी लागू है। 

26 प्रतिशत शुल्क से पूरी छूट चाहता है भारत

भारत अतिरिक्त 26 प्रतिशत शुल्क से पूरी छूट चाहता है। अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुओं, वाहन, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर शुल्क रियायतें चाहता है। दूसरी ओर, भारत प्रस्तावित व्यापार समझौते में कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शुल्क रियायतें चाहता है। 

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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